गुरुद्वारे में प्रार्थना करवाते ज्ञानी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सिखों के नवें गुरु गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस पर फतेहगढ़ स्थित गुरुद्वारे में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। समाज के लोगों ने गुरु के जीवन पर प्रकाश डालकर युवाओं से उनके बताए गए रास्ते पर चलने का आह्वान किया। रविवार को गुरु तेग बहादुर के 342वें बलिदान दिवस पर गुरुद्वारे में विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। सरदार सूर्य प्रताप ने गुरु तेगबहाुदर और उनके पुत्र गुरु गोविंद सिंह के जीवन के बारे में जानकारी दी।
बलविंदर सिंह ने गुरु की वीरता और पराक्रम को याद कर कहा कि गुरु जी ने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए अपने सिर को हंसते हुए बलिदान कर दिया था। कार्यक्रम में पहुंचे लोगों ने गुरु ग्रंथ साहिब पर रुमाला भेंट किया। सिखलाई रेजीमेंट सेंटर के ज्ञानी सुरजीत सिंह ने कहा कि सिख पंथ का इतिहास बलिदानी परंपरा का गवाह है। हिंदू धर्म की रक्षा के लिए ही खालसा पंथ की स्थापना की गई थी।
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि हर परिवार में एक सिख होना चाहिए सिख समाज के लिए यह गौरव की बात है। रेजीमेंट से आए नायक मनजीत सिंह, संदीप सिंह हवलदार लखवीर सिंह ने गुरु की महिमा का बखान करते हुए भजन सुनाए। भारत विकास परिषद के अध्यक्ष केके पाठक ने गुरुद्वारे में अल्पाहार की व्यवस्था की। इस दौरान डीएन कालेज के प्राचार्य केएम सचदेवा, विनोद सैनी, सरदार सतनाम सिंह, दीपक सिंह, हनी सिंह, महेश गुलाटी आदि मौजूद रहे।