फर्रुखाबाद। सदर तहसील क्षेत्र के गांव ठटा और दौली की मड़ैया में गंगा का रौद्र रूप दिख रहा है। रात भर शांति के बाद मंगलवार भोर में ही गंगा की धार से सात पक्के और चार झोपड़ी नदी में समा गईं। दौली की मड़ैया में दो घर गंगा में बह गए। जलस्तर बढ़ने के बाद पंखियन की मड़ैया में कटान रुका है। हालांकि लोग मकानों को खाली करने में लगे हैं।
सोमवार रात से ही गंगा का जलस्तर बढ़ने लगा। इसके बाद पंखियन की मड़ैया में कटान की रफ्तार पर कुछ ब्रेक लग गया। हालांकि यहां के लोग जल स्तर कम होने पर कटान तेज पकड़ने की आशंका को देखते हुए मकानों को खाली करने में लगे हैं। ठटा की मड़ैया (कटरी भीमपुर) में सोमवार रात कटान नहीं हुआ, मगर मंगलवार सुबह ही गांव के धर्मवीर, धनीराम, दुर्गेश, विजेंद्र, दीपक, अनिल वर्मा और रामतीरथ का दूसरा पक्का मकान कटान के साथ बह गया। इनके अलावा वीरेंद्र, अवधेश, वीर सिंह व ब्रजेश की झोपड़ी गंगा में समा गईं।
गांव का प्राइमरी स्कूल आधा गंगा में गिर चुका है। पास में ही बसे दौली की मड़ैया के भैयालाल, बलवीर समेत कुछ अन्य ग्रामीणों के मकान भी कटना बताया जा रहा है। ग्रामीण घरों को तोड़कर उनकी ईंटें कुछ दूरी पर खाली स्थानों पर लगाने के प्रयास में जुटे हैं। ग्रामीण मोटरबोट से घरेलू सामान लादकर शहर की ओर आ रहे हैं। दिन भर सामान को भरने उतारने में ग्रामीण व्यस्त हैं।
अंतिम वक्त तक डटे रहते ग्रामीण
गंगा की धार मकान से टकराकर चलने के बावजूद ग्रामीण बचने की आस में डटे रहते हैं। अपने सामने मकानों को गिरता देख महिलाओं का कलेजा कांप जाता है। उन्हें अपने और बच्चों के भविष्य को लेकर खासी चिंता होती है। मजबूर ग्रामीण चंद सामान लेकर शहर की ओर सुरक्षित स्थान पर आने को मजबूर हैं।