स्कूल का रसोईघर ढहा, प्रधानाध्यापिका बचीं
अमृतपुर (फर्रुखाबाद)। आठ वर्ष पूर्व बना प्राथमिक विद्यालय गूजरपुर गहलवार का रसोईघर बंदर के कूदने से ढह गया। पास में खड़ीं प्रधानाध्यापिका बाल-बाल बच गईं। मलबे की चपेट में आकर स्कूल की बाउंड्रीवाल भी टूट गई। बच्चों के स्कूल न आने से बड़ा हादसा होने से बच गया। इसकी जानकारी पर डीएम मानवेंद्र सिंह ने डीडीओ को जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।
विकास खंड राजेपुर के गांव गूजरपुर गहलवार स्थित प्राथमिक विद्यालय में वर्ष 2012 में रसोईघर का निर्माण कराया गया था। भवन प्रभारी शिक्षक ने निर्माण के दौरान घटिया सामग्री लगवा दी। इससे रसोईघर का भवन कुछ साल में जर्जर हो गया। वर्ष 2020 में स्कूल की बाउंड्रीवाल कायाकल्प योजना के तहत बनवाई गई थी। इसके निर्माण में भी गुणवत्ता की अनदेखी की गई। इससे बाउंड्रीवाल कुछ माह बाद ही कई जगह से चटक गई।
प्रधानाध्यापिका ने रसोईघर का भवन जर्जर होने और घटिया सामग्री से बाउंड्रीवाल बनाए जाने की शिकायत विभागीय अधिकारियों से की थी। एक सप्ताह पूर्व बंदरों के कूदने से रसोईघर का गेट दीवार समेत गिर गया था। बुधवार को प्रधानाध्यापिका रेनू जयंत ने स्कूल में लगी फुलवारी खराब कर रहे बंदरों को भगाया तो वे रसोईघर की छत पर चढ़ गए और कूदने लगे।
इससे रसोईघर भरभराकर गिर गया। इसके मलबे की चपेट में आने से स्कूल की बाउंड्रीवाल भी गिर गई। बंदरों को भगा रही पास में मौजूद प्रधानाध्यापिका मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बच गईं। प्रधानाध्यापिका का कहना है कि अभी बच्चों को स्कूल नहीं बुलाया जा रहा है। बच्चे न होने से बड़ा हादसा होने से बच गया। इस घटना की डीएम मानवेंद्र सिंह को जानकारी हुई। उन्होंने डीडीओ को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।
‘रसोईघर का भवन जर्जर होने की विभागीय अफसरों को कई बार सूचना दी गई। स्कूल की जो बाउंड्रीवाल बनाई गई है उसमें गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। इससे वह कई जगह से कुछ माह में ही चटक गई। इसकी भी जानकारी अफसरों को दी गई है।’
रेनू जयंत, प्रधानाध्यापिका
‘रसोईघर के जर्जर होने की रिपोर्ट आने पर उच्च अधिकारियों को इससे अवगत करा दिया था। बाउंड्रीवाल के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग हुआ है। इसकी भी रिपोर्ट अफसरों को भेजी गई है।’
रमेश चंद्र जौहर, बीईओ राजेपुर