विशेष अदालत एससीएसटी एक्ट के न्यायाधीश सैय्यद सरवर हुसैन रिजवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अभद्र टिप्पणी करने में पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को कोर्ट में तलब किया है। उनके खिलाफ सम्मन जारी किया गया है। इसमें 16 सितंबर की तारीख लगाई गई है।
लोकसभा चुनाव 2019 में फर्रुखाबाद सीट से पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद कांग्रेस प्रत्याशी थे। उन्होंने 24 अप्रैल को मोहल्ल मित्तूकूचा निवासी बबलू मिश्रा के घर पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री पर अभद्र टिप्पणी की थी।
इस पर शिवनगर कालोनी निवासी भाजपा कार्यकर्ता अनूप मिश्रा ने शहर कोतवाली में सलमान खुर्शीद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा कि वह गोरक्षा पीठ गोरखपुर व नाथ संप्रदाय के महंत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वह व्यक्तिगत रूप से जुड़े हैं। योगी आदित्यनाथ के लाखों अनुयायी हैं।
कांग्रेस प्रत्याशी ने मुस्लिम लोगों को प्रभावित करने के लिए जानबूझकर मुख्यमंत्री अभद्र टिप्पणी की है। उनके द्वारा जानबूझकर इस तरह का कृत्य किया गया जो समाज के लिए बहुत घातक है।
अपमानजनक टिप्पणी करने से मुख्यमंत्री के अनुयायियों और भाजपा कार्यकर्ताओं में आक्रोश पैदा हुआ। सलमान खुर्शीद ने जानबूझकर चुनाव के दौरान राजनीतिक लाभ लेने के लिए योगी आदित्यनाथ के खिलाफ गलत बयानी की है।
इसका आडियो और वीडीओ भी वायरल हुआ। मुकदमे की विवेचना कर रहे दरोगा तेज बहादुर सिंह ने सलमान खुर्शीद के खिलाफ आरोप पत्र लगाया। न्यायाधीश ने आरोप पत्र, प्रपत्र और साक्ष्यों का अवलोकन किया।
आरोप पत्र को कोर्ट के आदेश पर दर्ज रजिस्टर किया गया। आरोपी पूर्व विदेश मंत्री को कोर्ट में तलब करने के लिए सम्मन जारी किया गया। पत्रावली पर 16 सितंबर की तारीख लगाई गई है।
चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री पर अभद्र टिप्पणी करने में कांग्रेस प्रत्याशी सलमान खुर्शीद के खिलाफ दर्ज हुए मुकदमे में विवेचक ने एक धारा हटा कर आरोप पत्र दाखिल किया है। जांच के दौरान विवेचक ने छह लोगों के बयान दर्ज किए थे।
मोहल्ला शिव नगर कालोनी निवासी अनूप मिश्रा ने 24 अप्रैल को कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के खिलाफ धारा 153-ए, 298, 171-जी आईपीसी और 125 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, 1951, 1989 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें मुख्यमंत्री पर अभद्र टिप्पणी करने का आरोप लगाया था।
विवेचक तेज बहादुर सिंह ने वादी अनूप मिश्रा, मित्तूकूचा निवासी मनोज मिश्रा, बल्लू मिश्रा, कुक्कू चौहान, जीतू मिश्रा व राजू सारस्वत के बयान दर्ज किए थे।
धारा 298 आईपीसी का साक्ष्य न मिलने पर विवेचक ने उसे हटा कर धारा 153-ए,171-जी आईपीसी और 125 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया है। आईपीसी की धारा 298 धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने को शब्द उच्चारित करने पर लगाई जाती है।