फर्रुखाबाद। फर्जी कर्मचारियों के नाम पर 16.26 लाख रुपये के वेतन घोटाले के मामले की जांच अंतिम दौर में हैं। इसमें अधिकारियों सहित कई कर्मचारियों के भी फंसने के आसार हैं। निजी कंप्यूटर ऑपरेटर को सिंचाई विभाग में कौन लाया था, यह जांच का मुख्य बिंदु बन गया है।
नलकूप विभाग में छह फर्जी कर्मचारियों का वेतन बीजक बनाकर छह माह तक निकलता रहा। सिंचाई मंत्रालय से हुई शिकायत के बाद की गई जांच में 16 लाख 26 हजार 420 रुपये का घोटाला होने की पुष्टि हुई। इस पर नलकूप विभाग के तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने 24 जून 2022 को कैशियर मनोज कुमार व सिंचाई विभाग के निजी कंप्यूटर ऑपरेटर फैजान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
शासन से मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी गठित है। जांच कमेटी के अध्यक्ष अधीक्षण अभियंता नलकूप कानपुर धर्मेंद्र कुमार, अधिशासी अभियंता नलकूप व सिंचाई कन्नौज और वरिष्ठ कोषाधिकारी ने 27 दिसंबर को जांच की। उन्होंने नलकूप विभाग के आहरण वितरण अधिकारी, अधिशासी अभियंता सिंचाई सहित अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की। हालांकि इस मामले में जेल काट चुके कैशियर व कंप्यूटर ऑपरेटर, तत्कालीन अधिशासी अभियंता नलकूप अपना पक्ष लिखकर दे चुके हैं। जबकि आहरण वितरण अधिकारी को अभी अपना जवाब देना है।
जांच कमेटी ने वेतन बीजक पर जिन अधिकारियों व कर्मचारियों के हस्ताक्षर हैं, उनकी सूची भी तलब की है। कंप्यूटर ऑपरेटर किस लिपिक के पटल का काम कर रहा था, यह बिंदु भी जांच में शामिल किया गया है।
जांच कमेटी के अध्यक्ष अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि आहरण-वितरण अधिकारी सोमवार को अपना जवाब देंगे। जांच अंतिम दौर में है। शीघ्र ही शासन को जांच रिपोर्ट भेजकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।