दरगाह हुसैनिया मुजीबिया में आयोजित उर्स में रुहानी माहौल में सज्जादा
नशीन शाह फसीह की दस्तारबंदी की रस्म अदा हुई। इस दौरान अकीदतमंद पीरो
मुर्शिद की याद में डूबे रहे। कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश कर समा बांध
दिया। मोहल्ला सूफी खां की दरगाह में चल रहे उर्स में हजरत हुसैन बख्श
शाकिर रहमानी का कुल व फातिहा की महफिल सजी। इसमें लखीमपुर
खीरी के सज्जादा
नशीन सूफी शमसाद अहमद ने रुहानी माहौल में शाह फसीह मुजीबी की दस्तारबंदी
की रस्म निभाई गई। इससे पहले सज्जादा नशीन शाह फसीह ने दरगाह के बुजुर्गों
के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सूफी संतों ने भेदभाव मिटाकर
लोगों को एकसूत्र में पिरोने का काम किया है। यही वजह है कि इनके आस्तानों
पर रहमत की बारिश होती है।
इस दौरान अकीदतमंदों ने मजारों पर फूलमालाएं पेश
कर कुरआन की तिलावत की। कव्वालों की महफिल में मुन्ना मेहरबान ताज कव्वाल
ने सूफियाना कलाम पेश किया। इसके बाद लंगर का दौर चला। उर्स में कोलकाता,
झारखंड आदि प्रांतों के
अकीदतमंदों के अलावा जम्मू कश्मीर के साबिर अली
खां, वारिस अली, हाजी इस्लाम अली, इफ्तिखार अली खां, रहमत अली, मोहम्मद
नसीम, असलम नवाब, सूफी याहिया, सूफी दबीर अहमद, बिलाल शफीकी, जकी उल्लाह और
हाजी शफी आदि मौजूद रहे।