फर्रुखाबाद। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्रवेश प्रक्रिया में होने वाले घालमेल को सरकार ने गंभीरता से लिया है।
अब जिला स्तर पर समिति बनेगी, जिसके अध्यक्ष जिलाधिकारी होंगे। साथ ही आवेदकों का गहनता से सत्यापन किया जाएगा। प्रमाण पत्रों का ऑनलाइन सत्यापन किया जाएगा। दलालों व विभागीय कर्मियों पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी।
आरटीई के तहत कान्वेंट स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें गरीब बच्चों के लिए रिजर्व होती हैं। प्रवेश मिलने के बाद लाभार्थी का बच्चा कक्षा आठ तक कान्वेंट स्कूल में निशुल्क पढ़ सकता है। मगर इस योजना का लाभ गरीबों को मिल ही नहीं पाता।
कई जगह दलाल बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों से मिलकर गरीबों का हक छीन लेते हैं। यही नहीं कई स्कूल तो प्रवेश लेने में आनाकानी भी करते हैं।
इसे देखते हुए शासन ने नियमों में बदलाव कर दिया है। वर्ष 2026-27 में आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में नए नियम लागू किए जाएंगे। पहले आवेदनों की जांच शिक्षा विभाग के अधिकारी व कर्मचारी करते थे। अब आवेदन के साथ लगाए जाने वाले आय, मूल व जाति प्रमाण पत्रों आदि की जांच संबंधित विभाग ऑनलाइन माध्यम से सत्यापित कराएगा।
अभिभावक के साथ ही बच्चे का आधार कार्ड भी अनिवार्य किया गया है। सभी स्कूलों को अपनी खाली सीटों की जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
सीडीओ की देखरेख में होंगे प्रवेश
पहली बार आरटीई प्रवेश की देखरेख के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की गई है। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) इसके अध्यक्ष होंगे। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में अनुश्रवण समिति बनेगी। प्रमाण पत्रों की जांच संबंधित स्कूल प्रशासन भी ऑनलाइन पोर्टल पर कर सकता है।
आरटीई में प्रवेश पर नजर
- वर्ष 2022-23 : 257 चयनित, 172 प्रवेश
- वर्ष 2023-24 : 349 चयनित, 264 प्रवेश
- वर्ष 2024-25 : 723 चयनित, 550 प्रवेश
- वर्ष 2025-26 : 754 चयनित, 651 प्रवेश
आरटीई के प्रवेश प्रक्रिया के नियमों में बदलाव किए गए हैं। उसी के अनुसार प्रवेश प्रक्रिया की जाएगी। दलालों के साथ ही विभागीय कर्मचारियों पर भी नजर रखी जाएगी। पकड़े जाने पर कार्रवाई होगी। नियमानुसार ही आरटीई में प्रवेश होंगे।
- अनुपम अवस्थी, प्रभारी बीएसए