फर्रुखाबाद। सात साल पूर्व पुलिस पर फायरिंग व जानलेवा हमला करने के मामले में लुटेरे को न्यायालय ने दोषी ठहराया। न्यायालय ने दोषी को सात साल कारावास की सजा सुनाई।
कायमगंज कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक जसवंत सिंह ने तीन लुटेरों के खिलाफ पुलिस पर जानलेवा हमला करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि आठ जुलाई 2018 को वह क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। उसी समय तीन लुटेरों की सूचना मिली। लुटेरों को पकड़ने के लिए शमसाबाद, कंपिल पुलिस को वायरलेस से सूचना दी गई।
पुलिस को देखकर लुटेरे बाइकों से भागने लगे। सोतेपुर नहर के पास तीनों को घेर लिया गया। उसी समय लुटेरों ने तमंचे से फायरिंग कर दी। जैसे-तैसे पुलिसकर्मियों ने अपनी जान बचाई। पुलिस ने तीनों को पकड़ लिया था।
पूछताछ करने पर एक ने अपना नाम कंपिल थाना के गांव कादर दादपुर निवासी दलवीर, दूसरे ने जनपद एटा निवासी विकास चौहान व तीसरे ने भानु प्रताप बताया। तीनों के पास से अवैध हथियार भी बरामद हुए थे। पुलिस ने जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कर जांच की। विवेचक ने विवेचना पूरी कर तीनों के खिलाफ जानलेवा हमला, अवैध हथियार रखने के अपराध में न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।
मामले की सुनवाई कर रहे एडीजे नौ मेराज अहमद ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी। गवाह व साक्ष्य के आधार पर दलवीर को जानलेवा हमले व नाजायज हथियार रखने के मामले में दोषी ठहराया। दोषी को सात साल कारावास व 1800 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर सात दिन अतिरिक्त कारावास का प्रावधान किया। मामले में अन्य दो लुटेरों की सुनवाई चल रही है।