फोटो-4 बिलावलपुर से ठटा की मड़ैया जाने वाला उखड़ा पड़ा मार्ग। संवाद
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फर्रुखाबाद। बाढ़ को खत्म हुए भले ही दो माह बीत चुके हैं, मगर कई विभाग बाढ़ पीड़ितों की समस्या को लेकर गंभीर नहीं हैं। बाढ़ में उखड़ी सड़कों की मरम्मत कराने की जरूरत नहीं समझी गई। ऐसे में सात गांवों के हजारों ग्रामीण हिचकोले खाने को मजबूर हैं।
जिले में बाढ़ की विभीषिका खत्म होने के दो माह बाद भी हालात बदतर हैं। शासन ने सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के निर्देश दिए, मगर जिम्मेदार विभागों ने सुनवाई नहीं की। सदर तहसील के बिलावलपुर डिप से कटरी धर्मपुर, ठटा की मड़ैया, दिलीप की मड़ैया, पृथ्वीपुर समेत छह-सात गांवों के जाने वाला करीब ढाई किमी लंबा मार्ग उखड़ा पड़ा है।
डामरयुक्त मार्ग में बमुश्किल 500 मीटर ही सड़क सही है। शेष पूरा हिस्से की सड़क पर सिर्फ गिट्टी ही दिख रही है। 500 मीटर दूरी का हिस्से की सड़क में दो-दो फीट गड्ढे हो गए हैं। पुलिया भी बेहद जर्जर है।
कटरी क्षेत्र होने की वजह से यहां के अधिकांश लोग बुजुर्ग, महिला-पुरुष और बीमारों को ट्रैक्टर-ट्रॉली व बैलगाड़ी से शहर लाते हैं गड्ढा और पत्थर पड़ी सड़क पर निकलना दूभर हो रहा है। सबसे अधिक मुसीबत बैलगाड़ी और ट्रैक्टर-ट्रॉली से आने वाली गर्भवती महिलाओं को है। जबकि इस ओर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता मुरलीधर ने बताया कि बारिश और बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और निर्माण के लिए निविदा कराई जा रही है। जल्द काम शुरू कराकर सड़क का निर्माण कराया जाएगा।