शहर छोड़ खेत में बन रहीं सड़कें
फर्रुखाबाद। शहर में सड़कों का बुरा हाल है और नगर पालिका प्रशासन नियमों को ताक पर रख कर 84 लाख रुपये से दो सड़कें खेतों में बनवा रहा है। ये सड़कें जहां से शुरू हो रही हैं, वही अंतिम मकान है। इसके बाद सड़कें जहां तक जाएंगीं, वहां तक यानी चार-पांच सौ मीटर तक एक भी मकान नहीं है। एक सड़क के दोनों ओर घने बाग और दूसरे पर खेत हैं। खास बात यह है कि इन मार्गों पर खुद पालिकाध्यक्ष के खेत हैं। इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
नगर पालिका ने पांच दिन पहले दो सड़कें बनवाना शुरू किया है। इनमें एक वार्ड संख्या 41 गढ़ी मुरीद खां में बन रही है। बस्ती का अंतिम मकान राजू जाटव का है। यहां से करौंदा, नीबू, अमरूद आदि के बाग शुरू हो जाते हैं। करीब 500 मीटर दूर कब्रिस्तान है। नगर पालिका ने राजू जाटव के मकान से कब्रिस्तान तक के क्षेत्र को तीन भागों में बांटकर अपनों को फायदा पहुंचाने की जुगत निकाली है।
राजू जाटव के मकान से श्यामलाल की बगिया तक 12.61 लाख, श्याम लाल की बगिया से बेचेलाल की बगिया तक 11.47 लाख और बेचेलाल की बगिया से कब्रिस्तान तक 10.20 लाख रुपये में कुल तीन टेंडक दिए गए हैं। इस रोड की कुल लागत 34.28 लाख रुपये है। इसी तरह दूसरा रोड सईदों वाले मोहल्ले में शामेदीन के मकान से टोने वाले रोड से होकर आखिर तक करीब साढ़े 450 मीटर लंबा मार्ग बनाया जा रहा है।
20 फीट चौड़े इस रोड की लागत करीब 50 लाख रुपये है। इस पर भी सिर्फ खेत ही हैं। यहीं पर करीब 15 बीघा खेत पालिकाध्यक्ष का है। खेतों के किनारे रोड निकालने के बाद आबादी में शामिल करने की मंशा से सरकारी धन को खेतों में फिजूल खर्च किया जा रहा है। यही नहीं दूसरे मार्ग पर भी कब्रिस्तान के पास भी हुक्मरान का खेत बताया जा रहा है।
अपनों को फायदा पहुंचाने को टुकड़ों में टेंडर
यहां तैनात रहीं ईओ रश्मि भारती के खिलाफ आंदोलन खड़ा करने वाले सभासदों को अपने साथ लाने के एवज में सड़कों के छोटे-छोटे टुकड़ों के टेंडर उनके परिजनों के नाम संस्थाओं को दिए गए हैं। दोनों ही मार्गों पर दूसरे वार्डों के सभासद काम करवा रहे हैं।
ईओ सीमा तोमर के कार्यकाल में हुआ था प्रस्ताव
यहां तैनात रहीं ईओ रश्मि भारती के छुट्टी पर जाने के बाद 13 फरवरी को कायमगंज की ईओ सीमा तोमर को अतिरिक्त चार्ज दिया गया था। वह 12 मार्च तक यानी करीब 29 दिन तैनात रहीं। उसी समय खेतों में बनने वाले इन मार्गों को स्वीकृति प्रदान की गई थी।
शहर के मुख्यमार्ग जो हैं बदहाल
शहर के अनाज मंडी से भीकमपुरा रोड, पक्का पुल से गुदड़ी होकर नाला मछरट्टा, नाला मछरट्टा से नखास चौकी, ढुइया से छोटे-बड़े साहब की दरगाह तक आदि तमाम सड़कें ऐसी हैं, जिनकी हालत बदतर है। लोग नरक जैसे हालातों में जी रहे हैं।
‘बिना बस्ती के रोड डालने का कोई प्रावधान नहीं है। मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं है। यदि कहीं रोड डाला जा रहा है, तो इसकी जांच कराएंगे।’
- विवेक कुमार श्रीवास्तव, एडीएम/निकाय प्रभारी।
‘यह सभी काम पूर्व ईओ रश्मि भारती के कार्यकाल में पास हुए थे। आबादी है या नहीं मेरे संज्ञान में नहीं है। कब्रिस्तान की सड़क सभासद और जनता की मांग पर बन रही है। मेरे साफ निर्देश थे कि यह सुनिश्चित कर लें कि आबादी है या नहीं। रही बात मेरे खेत की, तो पूरे शहर में हर तरफ मेरे खेत हैं।
मैंने कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। मैं चाहती तो 10 साल के कार्यकाल में कभी भी रोड बनवा सकती थी। पास योजना पर आगे की कार्रवाई करना सीट पर बैठे अधिकारी की जिम्मेदारी बनती है।’
-वत्सला अग्रवाल, पालिकाध्यक्ष, नगर पालिका परिषद