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लाल कंचन आलू ने किसानों को कर दिया मालामाल

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पुखराज और 3797 प्रजाति का आलू भले ही किसानों को उनकी उपज का उचित दाम न दे रहा हो, लेकिन लाल आलू के साथ लाल कंचन प्रजाति के आलू ने किसानों को मालामाल कर दिया है। जहां अन्य आलू का भाव 400-460 रुपये प्रति क्विंटल है वहीं लाल कंचन आलू को 650 रुपये प्रति क्विंटल की दर से व्यापारी हाथोंहाथ ले रहा है।  
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लाल आलू की प्रमुख मंडी बिहार के साथ नेपाल मानी जाती है। विगत तीन वर्ष से पंजाब का प्रमुख पुखराज प्रजाति का आलू किसानों को कच्चे सीजन में मुनाफा दे रहा है। वहीं इस बार बाहर की मंडियों में कम मांग के चलते किसानों को उनको फसल का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। अब किसानों को आलू की प्रजाति परिवर्तित करने के लिए विचार करना होगा। इस बार किसानों ने लाल आलू के साथ नई प्रजाति लाल कंचन को भी लगाया है, जिसकी मांग गत वर्ष की भांति नेपाल व बिहार से इस बार भी जबरदस्त आई है। हालांकि यहां से सीधे आलू नेपाल नहीं भेजा जाता है। नेपाल को बिहार व गोरखपुर की मंडी द्वारा ही यह आलू उपलब्ध कराया जाता है। आढ़ती सुधीर वर्मा ने बताया कि इस बार गत वर्ष की अपेक्षा लाल कंचन आलू की आवक बढ़ी है। प्रतिदिन 20-25 मोटर आलू मंडी में आता है जिसे व्यापारी हाथोंहाथ खरीदता है। कहा कि किसानों को अब पुखराज को छोड़कर नई प्रजाति की ओर ध्यान देना होगा।

मोहम्मदाबाद के नगला इंद्रपुर निवासी किसान अंकुर यादव ने बताया कि इस बार कच्चे सीजन के आलू भाव ने किसानों को कोई लाभ नहीं दिया है। लागत निकालना भी भारी पड़ रहा है। अगले वर्ष से वह आलू की प्रजाति में परिवर्तन करेंगे या आलू से मुह मोड़ लेंगे। किसान कुलदीप सिंह का कहना है कि इस बार आलू की अगैती व गत वर्ष की पिछली फसल दोनों ही घाटे का सौदा साबित हुई हैं। अगले वर्ष से वह आलू को छोड़कर सरसों के खेती में ध्यान देंगे।
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