रामनगरिया में गूंज रही राम धुन
फर्रुखाबाद। मेला रामनरिया में रौनक बढ़ने लगी है। बाजार में भी लोग खरीदारी करते नजर आते हैं। मेले में कहीं भंडारे हो रहे हैं तो कहीं कथा में शंख और घंटे बजते हैं। अखाड़ों में राम धुन गूंजती रहती है। झूले वाले जरूर कुछ निराश हैं। उनका कहना है कि अभी भीड़ नहीं हो रही है। इससे कारोबार कम है।
गंगा के तट पर लगी मेला रामनगरिया में कल्पवासी गंगा स्नान के बाद साधु संतों की आश्रम में पहुंच कर प्रवचन सुन रहे हैं। जगह-जगह भजन कीर्तन हो रहे हैं। महिलाएं अपनी राउटी में ढोलक की थाप पर गंगा मैया के भजन गया रही हैं। मेला देखने वालों की भीड़ न होने से दुकानदारों की बिक्री कम हो रही है।
खुदे पड़े सीवर के गड्ढे, हैंडपंप खराब
मेला को खुले में शौच करने से मुक्त रखने के लिए ठेकेदार को पिछले साल से 350 रुपये बढ़ाकर 1250 रुपये प्रति शौचालय बनाने का ठेका दिया गया। इसी ठेकेदार के पास हैंडपंप लगाने का भी ठेका है। ठेकेदार ने किसी क्षेत्र में 70 से 80 हैंडपंप लगा दिए, तो किसी में एक या दो। वह भी खराब पड़े हैं।
साधु व कल्पवासियों का कहना है कि शौचालय बनवाने व हैंडपंप लगवाने के लिए ठेकेदार के पास दौड़ना पड़ रहा है। मेला प्रबंधक व सचिव से कई बार कहने के बाद भी काम नहीं हो रहा है। साधुओं ने बैगर नाम लिए मेला प्रशासन पर आरोप लगाया कि कुछ साधुओं के यहां मेला प्रशासन ने सभी व्यवस्था करा दी है। उन्हीं के यहां जाकर हालचाल पूछते हैं। मेला में आए हजारों साधुओं से कोई लेना देना नहीं है।
साधुओं ने नाराजगी जताई
मेला प्रशासन के द्वारा काम न किये जाने पर महंत सोमवारपुरी महाराज की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें महंत रामगिरि, महंत मकरंद गिरी, मंशा गिरी, रामानंद गिरी, आदि साधुओं ने नाराजगी जताई।
अस्थायी अस्पतालों में नहीं बने शौचालय
मेले में कल्पवासियों के लिए आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, एलोपैथिक अस्पताल खोले गए हैं। इनमें डाक्टर अन्य स्टाफ के लिए शौचालय नहीं बनाए गए हैं। पानी के लिए एक भी हैंडपंप नहीं लगा है। इससे स्वास्थ्य कर्मी परेशान हैं। डॉ. प्रीति सिंह, डॉ. अंशुमान दुबे, फार्मासिस्ट रवींद्र वर्मा आदि ने बताया कि पानी के लिए एक भी हैंडपंप नहीं लगा है। शौचालय भी नहीं बनाये गए हैं। इस कारण बहुत ही परेशानी होती है।