रविवार तड़के हुई मूसलाधार बरसात जायद की फसलों के लिए वरदान साबित होगी। हालांकि बरसात में गेहूं भीगने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो बरसात ने किसानों को काफी राहत दी है।
जिले में अभी भी करीबन 20 से 25 प्रतिशत गेहूं की फसल खेत में ही पड़ी है। तेज बरसात के चलते खेतों में कटी पड़ी किसानों की गेहूं की फसल भीगने से किसान परेशान हैं। किसानों का कहना है कि बरसात से गेहूं की काफी बाली झड़ गई। अर्रा पहाड़पुर गांव के राधाकिशन, रामकिशोर, दुल्ली, रामखिलाड़ी और मुकेश कुमार आदि किसानों का कहना है कि अब गेहूं की फसल सूखने पर ही खंदाई हो सकेगी। ऐसे में अगर फिर बरसात हो गई तो खेत में ही फसल सड़ भी सकती है। भूसा भीगने से वह भी सड़ सकता है। हालांकि इस बरसात से जायद की फसलों को काफी लाभ होगा। यह बरसात जायद की फसलों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी। जिन किसानों ने मक्का और उर्द आदि फसलें बो रखी हैं। उन्हें पानी नहीं लगाना होगा।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि बरसात से मक्का, उर्द और मूंग समेत जायद की सभी फसलों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि गेहूं की फसल को जरूर नुकसान होगा, क्योंकि बरसात से फसल की क्वालिटी पर असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि अप्रैल के आखिरी सप्ताह तक करीबन 80 प्रतिशत गेहूं की फसल किसान काटकर खंदाई कर चुका होता है। इसलिए इस बरसात से किसानों को ज्यादा नुकसान नहीं होगा। शमसाबाद के किसान रामजी पाठक ने बताया कि बरसात होने से खेत में कटाई के लिए जो गेहूं खड़ा है। वह भीग गया है। धूप निकलने पर गेहूं पतला पड़ जाएगा। किसान भीम चतुर्वेदी ने बताया कि रात में हुई बरसात से गेहूं भीग गया है। अब सूखने के बाद उसकी मड़ाई की जाएगी। राहुल दुबे ने बताया कि खेत में बीज के लिए गन्ना किया था। तेज हवा चलने और बरसात होने के करण फसल गिर गई है। जो गन्ने के गिर गए है। वह खराब हो गए है। इस कारण गन्ना फसल में भी नुकसान होगा।