फ़ोटो:12 मेजर एसडी सिंह विश्वविद्यालय में प्रदर्शित मॉडलों के विषय में छत्रों से जानकारी लेतीं ल
कमालगंज। मेजर एसडी सिंह विश्वविद्यालय में चल रहे राष्ट्रीय फार्मेसी सप्ताह के समापन दिवस पर आधुनिक औषधीय तकनीक सत्र का आयोजन किया गया।
इसमें लखनऊ की सहायक प्रोफेसर ने कहा कि आयुर्वेदिक व हर्बल दबाओं को तैयार करने में गुणवत्ता नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने उन्नत विधियों व तकनीक की जानकारी दी।
फार्मेसी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में छात्रों से संवाद हुआ। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय लखनऊ की सहायक प्रोफेसर डाॅ. अमृता यादव ने हाई परफॉर्मेंस थिन लेयर क्रोमैटोग्राफी की जानकारी दी।
बताया कि एचपीटीएलसी ने औषधीय अनुसंधान, गुणवत्ता नियंत्रण और विश्लेषण में नवीन संभावनाओं के द्वार खोले हैं। यह जटिल मिश्रणों को अलग करने, पहचानने और उनकी मात्रा निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण तकनीक है। बदलते दौर में आयुर्वेदिक व हर्बल दवाओं व सामग्री का वैश्विक महत्व बढ़ रहा है।
डीन डाॅ. बिन्दु राठौर ने अतिथि विशेषज्ञों को शाॅल ओढ़ाकर सम्मानित किया। फार्मेसी छात्रों ने मॉडल भी प्रस्तुत किए। इस मौके पर पुष्पेन्द्र बरदिया, रिंकेश कुमार, सुमित कुमार, विवेक आर्य, डाॅ. नेहा सिंह, महेन्द्र शर्मा, सूर्यकांत शुक्ला, अनीश, मेघा, जयंत मिश्रा आदि भी मौजूद रहे।