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Farrukhabad News: शोभायात्रा निकाल की बौद्ध स्तूप की परिक्रमा

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संकिसा। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर गुरुवार को धम्मा लोको बुद्ध बिहार से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। ढोल-बाजे के साथ यात्रा में शामिल भगवान बुद्ध के अनुयायी हाथ जोड़कर यात्रा में चल रहे थे। धार्मिक स्थल (स्तूप) पर पहुंचकर परिक्रमा व पूजा-अर्चना की गई। मुख्य वक्ता भिक्षु डाॅ. धम्मपाल महाथेरो ने भगवान बुद्ध के जीवन पर प्रकाश डाला। इस दौरान पुलिसबल भी मौजूद रहा।
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सुबह साढ़े सात बजे धम्मा लोको बुद्ध बिहार से शुरू हुई शोभायात्रा में तीन रथों पर भगवान बुद्ध की प्रतिमा विराजमान थी। बौद्ध अनुयायी ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, बौद्ध धर्म का नाम रहेगा, बौद्ध धर्म की क्या पहचान, मानव-मानव एक समान’ आदि नारे लगाते हुए चल रहे थे। ढोल नगाड़ों के साथ यात्रा धार्मिक स्थल (स्तूप) पर पहुंची। अनुयायियों ने स्तूप की परिक्रमा के बाद अगरबत्ती व मोमबत्ती जलाकर पूजा-अर्चना की। परित्राण पाठ भी किया गया।
खीर का प्रसाद वितरित किया गया। धार्मिक स्थल पर दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। लोग पूजा-अर्चना करते दिखाई दिए। धार्मिक स्थल के ऊपर किसी को भी जाने की इजाजत नहीं मिली। चौतरफा बेरिकेडिंग कर पुलिस तैनात की गई थी। बौद्ध भिक्षु डाॅ. धम्मपाल महाथेरो ने अनुयायियों से कहा कि स्तूप में भगवान बुद्ध की अस्थियां रखी हैं। हमारे लिए यह जगह और यह दिन पवित्र है। भगवान बुद्ध 502 ईसा पूर्व ब्रह्मा और इंद्र के साथ संकिसा आए थे।
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उन्होंने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा पर हम भिक्षुओं को दान देते हैं। भगवान बुद्ध ने 35 वर्ष की अवस्था में ज्ञान प्राप्त करने के बाद 45 वर्षों तक अवध और मगध की धरती पर पैदल चलकर 84 हजार धम्म स्कंध उपदेश दिए थे।
कार्यक्रम संयोजक कर्मवीर शाक्य ने भी विचार रखे। उपासिका श्रद्धा बजरी धम्मचारिणी ने कहा कि त्रविद पूर्णिमा को अगर बहुत दिनों तक रखना है तो शील ही उसका आधार है। समतामूलक समाज की स्थापना करना है तो खुद को बदलना पड़ेगा। मुख्य अतिथि सम्यक पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष तपेंद्र प्रसाद शाक्य ने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा को ही भगवान बुद्ध को ज्ञान आदि प्राप्त हुआ था। भगवान बुद्ध का सपना है देश अखंड हो। यह तभी होगा, जब मानव-मानव में करुणा होगी। जब तक आप करुणामय नहीं होंगे, तब तक आप कितनी भी बुद्ध की पूजा करो सब बेकार है। दूसरे धर्म की जो बुराई करता है, वह बुद्धिष्ट नहीं हो सकता।
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