फर्रुखाबाद। पांचालघाट स्थित मेला रामनगरिया में मंगलवार को साधु-संतों ने शोभा यात्रा व जल यात्रा निकाली। इससे मेला क्षेत्र में दिन जयकारों की गूंज के साथ धर्म ध्वजा फहराते रहे। यात्राओं में सजी झाकियां देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। वहीं बुधवार को मौनी अमावस्या पर विशेष स्नान पर्व होने से गंगा तट पर स्नानार्थियों की भीड़ खासी बढ़ गई है।
मेला रामनगरिया में 13 जनवरी से चारों ओर भजन कीर्तन, कथा पंडाल में कथाओं का आयोजन होने व यज्ञ में आहुति से गंगा तट सुगंधित हो रहा है। अग्नि अखाड़ा क्षेत्र से बच्चा स्वामी शिवस्वरूप ब्रह्मचारी अध्यक्षता में शतचंडी महायज्ञ के लिए जल यात्रा निकाली गई। इसमें ब्रह्मलीन स्वामी श्यामानंदजी महाराज की मूर्ति पालकी में लेकर भक्त जयकारे लगाकर चल रहे थे। नौ देवियों के स्वरूप के साथ राधा कृष्ण, शंकर-पार्वती के परिवार की झांकी आकर्षण का केंद्र बनी रही। जलयात्रा के आगे दूध व गंगा जल से बसुधारा प्रवाहित होती रही।
गंगा तट कलशों में जल भरकर पूजन किया गया। इसके बाद यज्ञशाला में कलश स्थापित किए गए। इस दौरान शस्त्र लेकर चल रहे साधु-संतों ने तलवार व फरसा से करतब दिखाए। बैंडबाजा व डीजे की ध्वनि पर श्रद्धालु व संत झूमते रहे। जल यात्रा के दौरान गंगा पुल पर जाम भी लग गया। इससे करीब आधे घंटे तक वाहन जाम में फंसे रहे ।
लोकगीत सुनकर दर्शक झूमे
दूरदर्शन लखनऊ से आई यूपी रत्न से सम्मानित लोक गायिका अंजलि खन्ना ने लोकगीत प्रस्तुत किए। चित्रकूट के घाट पर सबरी देखे बाट, मेरो खोए गयो बाजूबंद, मेरी गोरी गोरी बहियां, कलाकार सरला गुप्ता ने मेरी नैया में लक्ष्मण राम, मै गोरी साईयां काले मिले, लक्ष्मी सिंह ने भी लै चले पटना बाजार, जिया न लागे घर में आदि की प्रस्तुति देकर तालियां बटोरीं।
वीर सपूतों को किया याद
वैदिक, चरित्र निर्माण शिविर में चल रहे यज्ञ में कल्पवासियों ने आहुतियां डालीं। आचार्य चन्द्रदेव शास्त्री ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती जी के अनन्य भक्त लाला लाजपतराय ने भारत माता की आजादी के लिए अपना सर्वस्व अर्पण कर दिया था। उनके बलिदान के बीस वर्ष के भीतर ही ब्रिटिश साम्राज्य का अंत हो गया। उत्कर्ष आर्य, उदयराज आर्य, संजय यादव, हरिओम शास्त्री, शिशुपाल आर्य, अजीत आर्य,रत्नेश द्विवेदी, उपासना कटियार, नीति कुशवाह आदि रहे।