फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

समस्याओं के रावण का अंत कब आएगा

Mon, 10 Oct 2016 11:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
विज्ञापन
- फोटो : Rupesh
विज्ञापन
 मंगलवार को दशहरा पर्व पर रावण का धूमधाम से दहन होगा लेकिन चिंता का विषय यह है कि शहर में व्याप्त समस्या रूपी रावणों को मारने के लिए कौन से राम आएंगे। शहर में बिजली, सड़क, पानी जैसी मूलभूत समस्याओं के साथ ही अन्य समस्याएं भी खड़ी हैं।
विज्ञापन


जनप्रतिनिधि और अफसर इन समस्याओं के समाधान करने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। बड़ी समस्याओं को छोड़ो, छोटी-छोटी समस्याओं का भी समाधान करने में कई-कई महीने लग जाते हैं। शहर की प्रमुख जनसमस्याओं पर पड़ताल करती दशहरा पर विशेष रिपोर्ट :-।




आवारा जानवरों से आज तक नहीं मिली निजात
शहर में जगह-जगह आवारा जानवर घूमते हुए नजर आते हैं। इन जानवरों को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की है। आवारा जानवरों को रखने के लिए बीबीगंज में बेड़ारास भी है लेकिन आज तक पालिका प्रशासन आवारा जानवरों की समस्या से शहरियों को निजात नहीं दिला सकी है। हां साल-छह महीने में पालिका प्रशासन थोड़ा बहुत अभियान चलाकर औपचारिकता अवश्य पूरी लेता है।
विज्ञापन





...कौन बनवाएगा ठंडी सड़क
शहर की प्रमुख ठंडी सड़क मार्ग सालों से जर्जर है। यह सड़क को बनवाने के लिए सामाजिक संगठनों, व्यापारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों ने धरना-प्रदर्शन किया लेकिन हुआ कुछ नहीं। पीडब्लूडी के अफसरों ने तो साफ कह दिया कि बजट ही पास नहीं हो रहा तो सड़क कैसे बने। सदर विधायक विजय सिंह बजट पास करवाने में अभी तक सफलता हासिल नहीं कर सके। इसके अलावा भी शहर की कई प्रमुख सड़कें जर्जर पड़ी हैं।




नालों से नहीं हट रहा अतिक्रमण
फर्रुखाबाद और फतेहगढ़ युग्म नगरों में हर साल बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या आती है। यह समस्या कछियाना, छावनी, रेटगंज, रेलवे स्टेशन, भीकमपुरा, मऊदरवाजा गल्ला मंडी, लिंजीगंज, गुदड़ी, बहादुरगंज तराई और सलावत खां समेत करीब आधा दर्जन से ज्यादा नालों में हुए अवैध अतिक्रमण के चलते है। वर्ष 2012 में कछियाना व छावनी मोहल्ले में नाले के ऊपर बने अवैध मकान तोड़ने के लिए चिन्हित किए गए थे। दो-तीन मकान तोड़े भी गए लेकिन इसके बाद मामला आज तक ठंडे बस्ते में पड़ा है।




नहीं लगा कूड़ा निस्तारण प्लांट
जिले में कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाने की योजना वर्षों से बनाई जा रही है। इसके लिए नगर पालिका प्रशासन से जगह मांगी गई थी लेकिन अभी तक पालिका प्रशासन जगह उपलब्ध नहीं करा सका है। कूड़ा निस्तारण प्लांट न लगने  फर्रुखाबाद और फतेहगढ़ युग्म नगरों से रोजाना निकलने वाला कूड़ा कायमगंज-फर्रुखाबाद बाईपास मार्ग, बेवर-भोलेपुर बाईपास मार्ग के साथ ही अन्य मुख्यमार्गों के किनारे और खाली पड़े प्लाटों में फेंका जा रहा है।




जाम से कब मिलेगा निजात
शहर में जाम की समस्या आम है। रोडवेज बस स्टैंड के बाहर ही अवैध वाहन चालक सवारियों को बैठाते हैं। इससे जाम लगता है। इसको लेकर कई बार रोडवेज कर्मचारियों की डग्गामार वाहन चालकों से विवाद भी होता रहा है। पिकेट पुलिस पास में ही खड़ी रहती है लेकिन इसे रोकने में नाकाम रहती है। रोडवेज विभाग के अधिकारी भी इस ओर कोई ध्यान नहीं देते हैं। यही समस्या शहर के बाजारों में भी है।




गिर रही शैक्षिक गुणवत्ता
जिले के परिषदीय विद्यालयों की शैक्षिक गुणवत्ता ध्वस्त हो गई है। शिक्षक अधिकांश समय एमडीएम बनवाने व अन्य कार्य में गुजार रहे हैं लेकिन बच्चों को पढ़ाने में कोई ध्यान नहीं देते। जब भी प्रशासनिक अधिकारी स्कूलों का निरीक्षण कर गुणवत्ता परखते हैं तो अफसरों के सवालों का नौनिहाल जवाब नहीं दे पाते। इस तरह बदहाल हुई शैक्षिण गुणवत्ता कब सुधरेगी। इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है।



कब होगा अपराध पर कंट्रोल
हत्या, चोरी, चेन स्नेचिंग, छेड़छाड़ दुष्कर्म जैसी गंभीर घटनाएं कम होने के बजाए दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं। मानो पुलिस का खौफ अपराधियों के दिलों से धीरे-धीरे खत्म हो रहा हो। इसकी रोकथाम न होने से आम जनमानस भयभीत रहता है। आखिरकार अपराध पर कब रोक लगेगी। इसको लेकर हर कोई परेशान है। पुलिस कब अपराध पर कंट्रोल लगा सकेगी यह एक यक्ष प्रश्न सा बनता जा रहा है।


कब खत्म होगा जर्जर तारों से मौत का सिलसिला
ग्रामीण इलाकों में जर्जर तारों के टूटने से आए दिन किसी न किसी की जान जा रही है। या कोई न कोई ग्रामीण गंभीर रूप से झुलस जाता है, जिससे उसके जीवन में कठिनाइयां खड़ी हो जाती हैं। इन जर्जर लाइनों के टूटकर गिरने से मौत का सिलसिला आखिर कब बंद होगा। यह तो समय की गर्त में है। लेकिन इतना जरूर है कि बिजली अफसर चाहें तो समस्या से निजात मिल सकती है।




स्वास्थ्य सेवाएं पड़ीं धड़ाम
जिले में स्वास्थ्य महकमा डाक्टरों की कमी से जूझता चला आ रहा है। लोहिया अस्पताल से लेकर शहर व ग्रामीण इलाकों के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग भी इस ओर आंखें बंद कर बैठा है। अस्पताल आने वाले मरीजों को नीली-पीली गोलियां थमाकर वापस कर दिया जाता है। जिले के जनप्रतिनिधि और सीएमओ अस्पतालों में चिकित्सकों की तैनाती करवाने में कोई दिलचस्पी नहीं लेते हैं।




समय से नहीं मिलता राशन
सरकार ने पात्र गरीबों को चिन्हित कर उन्हें गृहस्थी योजना का लाभ दिया जाना शुरू किया। लेकिन अफसरों और कोटेदारों की मिलीभगत से शहर क्षेत्र में अभी भी करीब 30 प्रतिशत जनता को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिनके राशनकार्ड इस योजना के तहत बन भी गए हैं। उन्हें कोटेदार समय से राशन नहीं देते। पात्र गृहस्थी राशनकार्ड धारक संतोष कुमार, अनिल और अशोक आदि का कहना है कि उनके क्षेत्र के कोटेदार समय से राशन नहीं बांटते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें