फर्रुखाबाद। लॉकडाउन में 40 दिनों से शांत फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन गुरुवार सुबह 11.15 बजे बच्चों की चीख-पुकार से गूंज उठा। बच्चों के रोने की आवाजें इतनी तेज थीं कि बाहर तक सुनाई देे रहीं थीं। हुआ यूं कि अहमदाबाद से 11 सौ लोगों को लेकर बुधवार शाम सात बजे चली स्पेशल ट्रेन 20 घंटे बाद फर्रुखाबाद पहुंची।
ट्रेन में श्रमिकों के अलावा नौनिहाल व गर्भवती महिलाएं भी थीं। 550 रुपये किराया लेकर भी रेलवे प्रशासन ने गर्भवतियों को तो दूर नौनिहालों का पेट भी नहीं भर सका। यात्रा के दौरान रास्ते में किसी के लिए पेट भरने और प्यास बुझाने की व्यवस्था नहीं दिखाई दी।
इतना ही नहीं सुरक्षा में लगे जवानों के आगे ट्रेन में बैठा एक युवक इंजन बदले जाने के दौरान लगातार एक बोतल पानी भरने देने की अनुमति मांगता रहा। गर्व से सीना चौड़ा किए दरोगा ने कन्नौज में युवक को भोजन पानी मुहैया कराने की बात कहकर झिड़क दिया।
अहमदाबाद से ट्रेन से आए मजदूरों ने इंजन बदले जाने के दौरान अपना दर्द बयां किया। तमाम कष्ट सहने के बाद भी लोगों के चेहरों पर घर पहुंचने की खुशी दिखाई दी। अहमदाबाद से चली ट्रेन के इंजन बदलने की सूचना सुबह नौ बजे फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन पहुंची। इंजन बदलकर यहां से ट्रेन को रवाना किया जाना था। ट्रेन पहुंची, सभी बोगियों के दरवाजे अंदर से बंद थे।
अंबेडकर नगर निवासी अमित ने बताया कि रास्ते में कहीं भी उतरने नहीं दिया गया। जिला देवरिया के थाना इकौना के गांव विशुनपुर निवासी धर्मेंद्र ने बताया कि रेलवे की ओर से खाने व पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई। रामशरण व उसकी पत्नी दो बच्चे अपने घर बांदा जा रहे थे। उसने बताया कि रास्ते में दूध खत्म हो गया। गोरखपुर के सुुरेश, बहराइच के जय देशराज ने अपनी व्यथा सुनाई। ट्रेन यात्री पांच वर्षीय राशी और सात वर्षीय मानवी पानी के लिए जिद करने लगीं, लेकिन उनकी मांग उनके परिजन पूरी नहीं कर सके।
स्टेशन पर इंजन बदलने के दौरान कोई सवारी नीचे न उतरे, कोई थूके नहीं, बाहर निकलकर कुछ छुए नहीं यह देखने के लिए हर बोगी के आगे चार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। सिटी मजिस्ट्रेट अशोक मौर्या, सीओ सिटी मन्नी लाल गौंड, शहर कोतवाल वेद प्रकाश पांडेय, जीआरपी कासगंज के एसओ सोनू कुमार, मैनुपरी जीआरपी एसओ चिदानंद प्रकाश व आरपीएफ इंस्पेक्टर व्यवस्था संभाले रहे। पहले ट्रेन के प्लेटफार्म नंबर तीन पर आने की सूचना थी बाद में प्लेटफार्म नंबर दो आई।