शहर के मोहल्ला सलावत खां की नाली में बहता रंगीन पानी। संवाद
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फर्रुखाबाद। बंदी के बावजूद छपाई कारखानों में रविवार को छपाई चलती रही, गंदा पानी नालियों से होकर गंगा में जा रहा है। जांच के नाम पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम खानापूरी कर रही है।
गंगा में मुख्य स्नान से पांच दिन पहले छपाई कारखाने बंद करा दिए जाते हैं। इस बार एक फरवरी को मुख्य स्नान है, इससे 27 जनवरी से कारखाने बंद हैं। बंदी को प्रभावी करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कानपुर के दो अधिकारी शहर में ठहरे हैं। किंतु जांच के नाम पर खानापूरी की जा रही है।
रविवार को सुबह से धूप खिली, तो शहर के ज्यादातर कारखानों में छपाई और रंगीन कपड़ों की धुलाई होती रही। हजारों लीटर प्रदूषित पानी नालियों में बहता रहा। रंगीन कपड़े कारखाने में लटक रहे थे। दूषित पानी नालों से होता हुआ गंगा में जा रहा है।
कपड़ों की रंगाई में बहता है हजारों लीटर पानी
शहर में 50 स्थानों पर डाई की बड़ी मशीनें लगी हैं। इन मशीनों पर रोजाना बड़ी मात्रा में कपड़ों की रंगाई का काम किया जाता है। एक डाई करने वाली मशीन एक बार में एक हजार लीटर रंगीन पानी तक नाली में छोड़ती है। यह पानी सबसे ज्यादा घातक होता है।
दिन में कई स्थानों पर कारखानों की जांच की, मगर सभी बंद मिले। चोरी छिपे ही किसी ने चलाया होगा। बंदी के दिन कोई कारखाना चलता मिला तो कार्रवाई के लिए विभाग को लिखा जाएगा।- फरेश कुमार, सहायक पर्यावरण अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कानपुर