फर्रुखाबाद। कैंट के बरातघर में ड्यूटी कर रहे एक पीआरडी कर्मी की हालत बिगड़ गई। साथी उन्हें लोहिया अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनकी मौत हो गई।
परिजनों और साथियों ने आरोप लगाया कि कैंट में 12-12 घंटे की ड्यूटी कराई जाती है। इससे सभी कर्मी परेशान हैं। फतेहगढ़ कोतवाली के गंगापार बसे सुंदरपुर ग्राम पंचायत के मजरा कछुआ गाड़ा निवासी गोविंद यादव (50) कैंट के बरातघर में ड्यूटी कर रहे थे। शाम करीब चार बजे उन्होंने शरीर में दर्द होने की बात कही।
इसके बाद मेडिकल से दवा लाकर खा ली। वह पास में ही पड़े तख्त पर लेट गए। अचानक बेहोश होकर वह जमीन पर गिरे तो काम कर रहे मजदूरों ने कुछ दूर ड्यूटी कर रहे अरविंद को सूचना दी। साथी उन्हें लोहिया अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉ. अभिषेक चतुर्वेदी ने मृत घोषित कर दिया। शव मॉर्चरी में रखवाकर पुलिस को सूचना दे दी।
साथी की मौत पर पीआरडी सत्यपाल, रामवरन, दिनेश, राजीव आदि पहुंचे। देर शाम चचेरे भाई अनिल यादव भी पहुंच गए। बताया कि उनकी शादी नहीं हुई थी। छोटे भाई रघुराज, सोनपाल और राजपाल हैं। वह सुबह आठ बजे नाव से घर से निकले थे। इनसे 12 घंटे की ड्यूटी ली जाती है। रात के वक्त बाढ़ में जाना असंभव है, लिहाजा 12 घंटे की ड्यूटी करते हैं। फिर 24 घंटे दूसरा साथी करता है।
सत्यपाल और रामवरन ने बताया कि कैंट के सभी साथी 12 घंटे की ड्यूटी करके परेशान हैं। एक स्थान पर एक ही ड्यूटी करनी पड़ती है। कैंट से बाहर सभी जगह आठ घंटे और दो-दो लोग काम करते हैं।