नगला खैरबंद के रहने वाले आलू व्यापारी रामरतन शाक्य का कहना है कि एक हफ्ते पहले 3797 आलू की कीमत 1700 रुपये प्रति क्विंटल थी। मौजूदा समय में यह आलू 300 रुपया लुढ़ककर 1400 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। पुखराज की कीमत 1500 रुपये प्रति क्विंटल खुले बाजार थी। इस समय पुखराज भी 1200 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है।
सर्वाधिक स्वादिष्ट चिपसोना आलू 1850 रुपये प्रति क्विंटल बिक चुका है। लेकिन मौजूदा समय में 250 रुपये लुढ़ककर 1600 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि आलू की मांग बाहरी मंडियों में नहीं हो रही है। कानपुर मंडी में आलू 10-10 दिन पड़ा रहता है। मजबूरी में औने-पौने में बेचना पड़ता है।
आलू आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश वर्मा का कहना है कि आलू की दुर्दशा का प्रमुख कारण बाजार में भारी मात्रा में घुइया और मूली के आ जाने से हुई है। उनका कहना है कि मौजूदा समय में मूली 800 रुपये क्विंटल बिक रही है और घुइया का 900 रुपये प्रति क्विंटल भाव खुल रहा है। इस वजह से आलू के भाव में गिरावट आई हैं। शीतगृह मालिक मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि इस वर्ष तक 50 फीसदी आलू की निकासी हो जाती थी।
एकाएक मांग कम होने से मौजूदा समय में केवल 23 फीसदी ही आलू की निकासी हो सकी है। बाहर की मंडियों में आलू की मांग कम होने से शीतगृहों से भंडारित आलू नहीं निकल रहा है। आलू विकास विभाग के निरीक्षक एके सेंगर का कहना है कि लोग इस समय आलू की जगह घुइया खरीद रहे हैं और हरी सब्जी में फुटकर में 10 रुपये किलो पत्तेदार मूली बिकने के कारण आलू को रक्षाबंधन पर करारा झटका लगा है।
आलू से जिस तरह से मट्ठा के आलू और फ्राई आलू तैयार सब्जी बनाई जाती थी। घुइया में यह सब गुण व्याप्त हैं। इस वजह से आलू पर मंदी आ गई है। उनका कहना है कि खास वजह यह रही कि कम बारिश के कारण घुइया और मूली समय से पहले तैयार हो गई और भारी मात्रा में बाजार में आने से आलू की कीमत को कम कर दिया।