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आलू के दाम औंधे मुंह गिरे, किसान परेशान

Thu, 06 Jul 2017 11:51 PM IST
फर्रूखाबाद
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potao - फोटो : आलू
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आलू के अच्छे दाम लेने के लिए किसानों ने जिले के 65 शीतगृहों में साढ़े पांच लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित कर रखा है। आलू निकासी का जब समय आया तो किसानों की किस्मत दगा दे गई। शीतगृह से यदि किसान 50 पैकेट आलू की निकासी करता है तो उसे साढ़े सात हजार रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है। शीतगृह मालिकों का कहना है कि आलू की पैदावार अधिक होने से देश भर के शीतगृह फुल चल रहे हैं। किसी भी शीतगृह में सात फीसदी से अधिक निकासी नहीं हुई है, जबकि पिछले वर्ष इस अवधि तक 20 से 25 फीसदी तक निकासी हो चुकी थी।
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यह है आलू का गणित
कुइंयाधीर के रहने वाले प्रगतिशील किसान सुधांशु गंगवार का कहना है कि एक बीघा खेत में आलू तैयार करने और शीतगृह में भंडारण के बाद उसकी निकासी करने में कुल 17,500 रुपये खर्च आता है। इसका गणित ये है कि 1100 रुपये की डीएपी, 300 की पोटास, 4200 का बीज, 1000 रुपये जुताई, 300 रुपये बुवाई, 600 रुपये सिंचाई, 200 रुपये जिंक, सल्फर, फोराडेक्स, 250 रुपये यूरिया, 500 रुपये की फसल सुरक्षा के लिए दवाइयां, 1000 रुपये खुदाई, 700 रुपये ग्रेडिंग, 1150 रुपये का बारदाना, 5550 रुपये कोल्डस्टोरेज भाड़ा मिलाकर कुल 17,500 रुपये लागत आती है। इतने क्षेत्र में 50 पैकेट आलू पैदा होता है। मौजूदा समय में 200 रुपये प्रति पैकेट आलू बिक रहा है। 10000 रुपये का आलू एक बीघा में निकल रहा है। इसलिए साढ़े सात हजार रुपये किसानों को घाटा हो रहा है।

सात फीसदी ही आलू निकासी हो सकी
एसआर कोल्ड स्टोरेज के मालिक मोहन अग्रवाल का कहना है कि आलू की कीमत गिरने का प्रमुख कारण यह है कि अब बंगाल, बिहार, पंजाब, हरियाणा सभी प्रांतों में आलू पैदा होने लगा है। शीतगृह में भंडारित आलू में से अब तक केवल सात फीसदी आलू निकासी हो पाई है। मंदी के चलते किसान अपना आलू नहीं निकाल रहा है।
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शीतगृह मालिक भी झेल रहे घाटा
लक्ष्मी कोल्ड स्टोरेज के मालिक एवं शीतगृह एसोसिएशन के महामंत्री उमेश अग्रवाल का कहना है कि शीतगृह मालिकों को भी बिजली आदि का घाटा झेलना पड़ रहा है। निकासी के बाद मशीनों को कम चलाना पड़ता है, इससे डीजल और बिजली की बचत होती है। इस बार निकासी न होने की वजह से अनावश्यक रूप से बिजली व डीजल का खर्चा शीतगृह मालिकों को उठाना पड़ रहा है। किसान के साथ शीतगृह मालिक भी तबाह हुए हैं।

दाम न मिलने से किसानों की कमर टूटी
चौकी महमदपुर के किसान नारद सिंह का कहना है कि किसानों ने 72 साधन सहकारी समितियों व बैंकों से करोड़ों रुपये का ऋण लेकर आलू की फसल तैयार की थी। आलू के भाव शीतगृह में भंडारित करने के बाद भी किसानों को नहीं मिले। इससे किसानों की कमर टूट गई है। अन्नदाता के पास अब भूखों मरने की नौबत है।

बोले जिम्मेदार
प्रतिवर्ष यहां करीब 42 हजार हेक्टेयर भूमि पर आलू की खेती कराई जाती है। आलू की बंपर पैदावार होने की वजह से इस बार आलू के दाम माटी के मोल पहुंचे हैं। किसान को घाटा हो रहा है। किसानों को अपना फसल चक्र बदलना होगा। अन्यथा किसान इसी तरह के घाटे को झेलता रहेगा।
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- नैपाल राम, जिला आलू एवं शाकभाजी विकास अधिकारी।

 
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