फार्रुखाबाद/कमालगंज। नई फसल से पहले आलू के भाव को एक बार फिर झटका लगा है। खेतों में गड़ाई कम होते ही आलू का भाव दो सौ रुपये प्रति क्विंटल लुढ़क गया है।
बाहर की मंडियों के साथ ही असम व बंगाल में भी भाव गिरे हैं। इससे शीतगृहों से आलू निकासी फिर धीमी हो गई है। सब्जियों का राजा आलू सुर्खी पकड़ने के बाद अब लुढ़कने लगा है। इससे किसानों में बेचैनी हो रही। नई फसल के लिए गड़ाई कम होने के साथ भाव लुढ़कने शुरू हुए तो चार दिन में ही 200 रुपये प्रति क्विंटल आलू गिर गया।
700 रुपये पैकेट (50 किलो) बिक रहा चिपसोना आलू 600 रुपये में आ गया। ख्याती 600 से गिरकर 500 रुपये पैकेट आ गया। हालैंड व कंचन में भी सौ रुपये पैकेट गिरावट आई है।
दिनारपुर के आलू व्यापारी कौशलेंद्र सिंह ने कहा कि बाहरी राज्यों में यहां से सबसे ज्यादा असम आलू जाता है। वहां भी भाव गिरा है। इस्लाम निराला ने बताया कि बंगाल से छत्तीसगढ़ व झारखंड आलू जाता है। बंगाल में भी भाव ढीले हो रहे। कुछ दिन पहले तक खेतों में नई फसल की गड़ाई के लिए शीतगृहों से आलू अधिक निकल रहा था। जबकि बाहर की मंडियों में बिकने जाने के लिए आलू कम निकल पा रहा था। इसलिए भाव में सुर्खी आई थी। आसाम के लिए ट्रकों की उपलब्धता कम होने व भाड़ा बढ़ना भी भाव गिरावट में असर डाल रहा।
600 रुपये में नहीं बेचा चिपसोना, करेंगे इंतजार
कमालगंज के सुमित्तापूर निवासी किसान सरनाम सिंह कुशवाहा ने बताया कि वह शनिवार को चिपसोना आलू बेचने शीतगृह में आए थे। उनका 80 पैकेट आलू 600 रुपये पैकेट ही व्यापरियों ने मांगा। दो सौ रुपये क्विंटल भाव कम हो जाने से उन्होंने आलू नहीं बेचा। अब दो-तीन दिन इंतजार करेंगे। भाव न बढ़ा तो भी आलू तो बेचना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि एकदम इतना भाव कम हो जाने से फिलहाल किसानों ने शीतगृह से निकासी कम कर दी है। गड़ाई बिल्कुल कम हो जाने से बिहार में भी फसल के लिए यहां के आलू की मांग नहीं रही।
बारिश के कारण बीजा गुल्ला 900 वाला 500 में
अगेती फसल की गड़ाई के समय हुई बारिश ने छोटे साइज के आलू (बीजा) का गणित गड़बड़ कर दिया। समय निकल जाने से कई किसानों ने बीजा के बजाय आलू काटकर कतरिया की गड़ाई की। इससे गाड़ने के लिए भंडारित किया गया छोटे साइज का आलू किसानों के पास काफी बच गया, वह अभी शीतगृहों में है। पहले बीजा का भाव 450 रुपये पैकेट से भी ज्यादा था। पसई नगला के किसान उजागार लाल का कहना है कि अब 250 रुपये पैकेट भी बीजा बिक पाने के लाले हैं।