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आलू भाव 200 रुपये पैकेट तक गिरा, नहीं निकल रही लागत

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फर्रुखाबाद। कच्ची (अगैती) आलू की उपज बहुत ही कम है। मंडी भी भाव भी 200 रुपये प्रति बोरी (पैकेट) कम हो गया। इससे किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है।
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कच्ची आलू की उपज प्रति बीघा 20-25 बोरी होती थी। इस बार 8 से 10 बोरी ही निकल रही है। मंडी में आलू की आमद कम होने के बावजूद भाव लगातार घटता जा रहा है। शुक्रवार को मंडी में 200 बोरी आलू ही आया था। छोटे साइज का आलू 751 रुपये प्रति बोरी और बड़े साइज का 811 रुपये प्रति बोरी में बिका था।
शनिवार को 200 बोरी आलू पहुंचा। मंडी में भाव और कम हो गया। आलू 551 रुपये से 671 रुपये प्रति बोरी में खरीदा गया। राकेश राजपूत की आढ़त पर में सबसे अच्छा 14 बोरी आलू 751 रुपये के हिसाब से बिका। आढ़तियों का कहना है कि पंजाब में नया आलू आ गया है। बाहर की मंडियों में आलू का भाव 600 से 650 रुपये है। इससे यहां भी दाम घटे हैं।
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गांव नगला कलार निवासी किसान अहिवरन सिंह ने मंडी में 33 पैकेट आलू बेचा। 651 रुपये प्रति पैकेट की दर से बिक्री हुई। उन्होंने बताया कि चार बीघा खेत में करीब 21500 रुपये का आलू निकला। जबकि कुल लागत 28 हजार रुपये आई। उत्पादन कम होने से इस बार आलू में घाटा हो रहा है।
गांव चुरसाई निवासी राकेश सिंह के 2.5 बीघा खेत में 22 पैकेट आलू निकला। मंडी में 701 रुपये प्रति पैकेट के हिसाब से 15422 रुपये का आलू बिका। उन्होंने बताया कि गत माह बारिश होने से खेत में आधा बीज सड़ गया था। इसी वजह से उत्पादन में भी कमी आई। लागत में भी घाटा हो रहा है। आलू की कच्ची फसल बेचना मजबूरी है।
तीन हजार रुपये बीघा किसान को घाटा
आलू आढ़ती एसोसिएशन अध्यक्ष सुधीर वर्मा उर्फ रिंकू ने बताया कि खेत में आलू काफी कम मात्रा में निकलने से किसान की लागत नहीं निकल पा रही है। एक किसान के तीन बीघा खेत का 13 पैकेट आलू निकला और 9100 रुपये में बिका। जबकि उसने 16 पैकेट बीज सहित करीब 20 हजार रुपये की लागत लगाई। औसतन तीन हजार रुपये बीघा किसान को घाटा हो रहा है।
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