फर्रुखाबाद। बिना ड्यूटी किए साढ़े तीन वर्ष तक सिपाही के वेतन निकाले जाने के मामले में जांच के नाम पर खानापूर्री की जा रही है। दस दिन बीतने के बाद अब तक सीओ सिटी के कार्यालय से गणना, एकाउंट, कैश पटल के कर्मचारियों को बयान के लिए नोटिस भेजे जा सके हैं। ऐसे में इस वर्ष के अंत तक जांच पूरी होती नहीं दिख रही है। जांच भी डीएम के आदेश पर अमर उजाला अखबार की खबर के आधार पर कराई जा रही है।
कानपुर देहात के गांव कपूरपुर का रहने वाला सिपाही नरेश सिंह यादव 4 अप्रैल 2016 को पुलिस लाइन से जहानगंज तबादले पर भेजा गया था। सिपाही ने थाने में आमद कराई नहीं और गैरहाजिर हो गया। पुलिस लाइन से बिना ड्यूटी के सिपाही को साढ़े तीन वर्ष तक वेतन दिया जाता रहा था। 13 दिसंबर को सिपाही की अपने गांव में ही बीमारी से मौत हो गई। 14 दिसंबर को सिपाही के परिजनों ने आरआई किश्वर अली को मौत की जानकारी दी। तब सिपाही की तैनाती के बारे में खोजबीन की गई।
इसके बाद पता चला कि तत्कालीन एसपी संतोष मिश्रा ने अक्तूबर 2018 में सिपाही नरेश के गायब होने पर आरआई व एकाउंट शाखा प्रभारी को वेतन रोकने के आदेश दिए गए थे। दस माह तक सहायक लेखाकर ने वेतन रोके रखा और अगस्त 2019 में बिना किसी अफसर के आदेश के वेतन रिलीज कर दिया। इतना खुलासा होने के बाद भी अफसरों ने जांच के नाम पर तेजी नहीं दिखाई। अमर उजाला की खबर को संज्ञान लेते हुए डीएम के आदेश पर सीओ सिटी को जांच दी गई।
घटना के दस दिन बाद सीओ कार्यालय से बयान के लिए गणना के तीन कर्मचारी, कैश पटल के दो कर्मचारी व एकाउंट शाखा के प्रभारी को नोटिस भेजे गए हैं। मंगलवार को कैश पटल के दो कर्मचारियों ने अपने बयान दर्ज कराए हैं। इसमें कहा कि उनको गणना कार्यालय से कभी सिपाही के न होने के बारे में सूचित नहीं किया गया है। वेतन मिलान कर रिपोर्ट आरआई के हस्ताक्षर से भेजी जाती रही है। किसी भी दस्तावेज में उनके हस्ताक्षर नहीं है। सीओ सिटी मन्नी लाल गौंड ने बताया कि जांच में देरी नहीं की जा रही है। शीघ्र ही सभी के बयान दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।