फर्रुखाबाद। जनपद में किसानों व व्यापारियों का दिवाली के त्योहार पर आलू से खुशियां खरीदने का सपना अधूरा रह गया। मुनाफे की उम्मीद लगाए किसानों और व्यापारियों को घाटा हो रहा है।
आलू का अच्छा दाम न मिलने से वह निराश हैं। इससे शीतगृहों में अभी भी चार लाख मीट्रिक टन से अधिक आलू डंप है। आलू का भाव न बढ़ने से इस बार आलू किसान व व्यापारियों का त्योहार फीका नजर आ रहा है। आलू के सीजन पर भाव एक हजार रुपये से लेकर 1200 रुपये प्रति क्विंटल था।
इससे बड़े किसानों ने भाव बढ़ने की उम्मीद में आलू नहीं बेचा और व्यापारियों ने भी मुनाफे की आस में आलू खरीदकर शीतगृृहों में खूब भंडारण किया। जिले के 109 शीतगृहों में 77 लाख 96 हजार 685 मीट्रिक टन आलू भंडारित किया गया।
शुरुआती दौर में आलू का भाव अच्छा होने से भंडारण के बाद खूब मुनाफा कमाने की उम्मीद थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। भंडारण से लेकर परिवहन भाड़ा, पल्लेदारी सहित करीब 400 रुपये प्रति क्विंटल आलू पर खर्च आया।
इसके बाद भी इन दिनों 900 रुपये से लेकर 1000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव में ही आलू बिक रहा है। इससे 400 रुपये प्रति क्विंटल घाटा हो रहा है। वहीं कुछ लोगों ने तो उधार रुपये लेकर आलू खरीदकर भरा। उन्हें तो कर्ज चुकाना भी मुश्किल है।
ऐसे में आलू का भाव न बढ़ने से आलू किसानों व व्यापारियों का खुशियां खरीदने का सपना अधूरा रह गया। हालात यह हैं कि गत वर्ष 18 अक्तूबर तक 67 फीसदी आलू की शीतगृहों से निकासी हो चुकी थी। वहीं, इस वर्ष अभी तक 48 प्रतिशत ही निकासी हुई है। इससे अभी चार लाख पांच हजार 436 मीट्रिक टन आलू शीतगृहों में भंडारित है।
नेपाल से मांग बढ़ी, भाव बढ़ने की उम्मीद
सातनपुर मंडी के आलू निर्यातक सुधीर शुक्ल ने बताया कि अब नेपाल में आलू की मांग बढ़ी है। मंगलवार को 30 टन आलू नेपाल भेजा गया। बीज में भी आलू की मांग बढ़ी है। इससे आलू का भाव 1600 रुपये प्रति क्विंटल पहुंचने की उम्मीद है। वहीं आलू व्यापारी वृंदावन मिश्र ने बताया कि आसाम से आलू की मांग आ रही है। वहां भाव भी अच्छे हैं। दिवाली के बाद आसाम के लिए रैक लोड की जाएगी। एक रैक में 20 हजार बोरी आलू जाएगा। स्थानीय स्तर व गैर जनपदों में भी आलू की मांग बढ़ रही है। इससे भाव में उछाल आने की उम्मीद है।
आलू की बोआई के साथ अब शीतगृहों से निकासी भी तेज हुई है। प्रतिदिन तेजी से आलू की निकासी हो रही है। अब आलू के भाव भी बढ़ोतरी होने से आलू की निकासी भी जल्दी होने की उम्मीद है।
-पुष्पेंद्र सिंह, उद्यान निरीक्षक फर्रुखाबाद।