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गंगा-रामगंगा का जलस्तर घटा, ग्रामीणों को बीमारियों ने जकड़ा

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अमृतपुर। गंगा का पांच और रामगंगा का 15 सेंटीमीटर जलस्तर कम हुआ है। इसके बावजूद बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों की परेशानियां कम नहीं हुईं हैं। पानी घटने के साथ गांवों में बीमारियों ने भी पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। खासी, बुखार व खुजली से कई ग्रामीण ग्रसित हैं। स्वास्थ्य टीमों के गांव में न जाने से गांव के लोग बैलगाड़ी, नाव पर बैठकर या बच्चों को कंधे पर बैठाकर पैदल भरे हुए पानी को पार कर सीएचसी और पीएचसी दवा लेने पहुंच रहे हैं। हर किसी को राहत सामग्री भी नहीं मिल पा रही है।
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शुक्रवार को गंगा का जलस्तर 136.95 से घटकर 136.90 मीटर पर पहुंच गया। रामगंगा का जलस्तर 135.60 से घटकर 135.45 मीटर पर आ गया है। गंगा में 1 लाख 39 हजार 398 क्यूसेक और रामगंगा में 69931 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा में छोड़े गए पानी की मात्रा अधिक होने से जलस्तर बढ़ने की आशंका बन गई है। बाढ़ से समस्याएं झेल रहे ग्रामीण अब बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं। गांव हरसिंहपुर कायस्थ में
रामकिशोर, धर्मपाल, धनपाल, मूगेलाल, अहिवरन, श्यामादेवी, जगदीश व महाराज खासी, जुकाम, खुजली की बीमारी से परेशान हैं। गांव ऊगरपुर में दिनेश चंद्र, सुरेश चंद्र, रामऔतार, जयराम, गांव कुड़री में बबलू, सुंदरलाल, दिनेश चंद्र, रघुवीर, राधेश्याम, गांव जोगराजपुर में सुरेश चंद्र, रामकिशोर, समरपाल, नन्हीं देवी, रामप्यारी,
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कुंदनलाल समेत कई ग्रामीण खासी, बुखार व खुजली से ग्रसित हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए स्वास्थ्य टीमों का गठन नहीं किया है। स्वास्थ्य टीमों के गांव में न आने से गांव के लोग नाव, बैलगाड़ी पर बैठकर या बच्चों को कंधे पर बैठाकर ग्रमीण पैदल भरे पानी को पार कर पीएचसी और सीएचसी पर दवा लेने आ रहे हैं। बाढ़ के पानी से ईधन और खाद्य सामग्री भीगने से अब ग्रामीणों के सामने पेट भरने की भी व्यवस्था नहीं है। प्रशासन की ओर से जो राहत सामग्री भेजी जा रही है। वह प्रधान अपनी सूची के अनुसार बंटवा रहे हैं। लेखपाल राहत सामग्री सीधे प्रधानों के पास लेकर जाते हैं। अभी तक प्रशासन की ओर से छह गांवों में राहत सामग्री बंटवाई है। वह भी गांव में सभी ग्रामीणों को नसीब नहीं हुई।
बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए स्वास्थ्य टीमों का गठन करने के लिए सीएमओ को पत्र लिखा था। अभी तक टीमों का गठन नहीं किया गया। इस संबंध में डीएम को पत्र लिखा जाएगा। प्रधान की सूची के अनुसार राहत सामग्री देने के मामले के संबंध में जानकारी की जाएगी। हर किसी को राहत सामग्री दी जाएगी। बृजेंद्र कुमार, एसडीएम अमृतपुर
अमृतपुर। सीएचसी राजेपुर व पीएचसी अमृतपुर में पानी में डालने वाली क्लोरिन गोली, ओआरएस पांउडर, पैरासीटामाल समेत अन्य दवाएं नहीं हैं। पीएचसी अमृतपुर के डा. गौरव वर्मा ने बताया कि बाढ़ आने पर गांवों में बंटवाने वाली दवाएं अभी तक नहीं आई हैं। जिन दवाओं को पीएचसी में टोटा है, उनकी डिमांड भेज दी गई है। सीएचसी राजेपुर के फार्मासिस्ट बीके मिश्रा ने बताया कि डिमांड भेजी थी। अभी तक दवाएं नहीं मिली है।
अमृतपुर। बाढ़ से माखन नगला गांव जाने वाली सड़क कट गई है। इसी मार्ग से गांव राम प्रसाद नगला, मिघन नगला, कालिका नगला, फुला, जटपुरा गांव के लोग आवागमन करते हैं। बाढ़ से सड़क कटने से छह गांवों का आवागमन प्रभावित हो गया है। उधर बदायूं मार्ग पर गांव चित्रकूट के पास बाढ़ का पानी सड़क पर बह रहा है। गंगा का जलस्तर कम होने पर सड़क से बहने वाले पानी की मात्रा कुछ कम हो गई है।
तीन सौ की सूची में दस को दी गई राहत सामग्री
नाव से बाढ़ का पानी पार कर राहत सामग्री लेने सड़क किनारे आए ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी
शमसाबाद। भाजपा सांसद मुकेश राजपूज शुक्रवार को एसडीएम कायमगंज सुनील कुमार यादव के साथ कटरी तौफीक गांव के पास सड़क पर राहत सामग्री लेकर पहुंचे। सांसद को गांव के 300 लोगों की सूची तैयार दी गई। यहां केवल दस ग्रामीणों को राहत सामग्री के पैकेट मिले। इसके बाद सांसद रूपपुर मंगलीपुर में सड़क पर भरे पानी से गुजर कर गए। यहां करीब 120 लोगों को राहत सामग्री बांटी। एसडीएम सुनील कुमार यादव ने बताया कि राहत सामग्री के पैकेट खत्म हो गए थे। इस कारण पैकेटों को मंगाया गया है।
शाहजहांपुर मार्ग पर दो फीट बह रहा पानी
शमसाबाद। शाहजहांपुर मार्ग पर ढाईघाट पुल के पास करीब दो फीट पानी बह रहा है। इससे शाहजहांपुर जाने वाले मार्ग पर आने-जाने वाले लोगों को खतरा बना हुआ है। सफर करने वाले लोग डर-डर कर भरे हुए पानी से वाहन निकालते है।
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