फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संविदा समाप्त होना मुसीबत बन गया। सोमवार को ओपीडी में पहुंचे 844 मरीजों में 200 के करीब आर्थो संबंधी थे।
दिव्यांग बोर्ड गए आर्थो सर्जन के चलते मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा। एकमात्र सर्जन के कमरे में दिखाना तो दूर मरीजों को पर्चा जमा करने कठिन हो रहा है।
अस्पताल की ओपीडी में सुबह 11 बजे लंबी कतार लगी थी। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मनोज पांडेय, फिजीशियन का इलाज कर रहे डॉ. प्रवीन कुमार, डॉ. अभय श्रीवास्तव और अवैतनिक सेवाएं दे रहे बालरोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप दीक्षित, फिजीशियन डॉ. प्रज्ञा मिश्रा मरीजों को देख रही थीं।
टीबी एवं चेस्ट फिजीशियन डॉ. ध्रुवराज सिंह और डॉ. अंकित मिश्रा के यहां चंद मरीज ही थे। आर्थो सर्जन डॉ. रिषिकांत वर्मा के कमरे के बाहर मरीज इंतजार में थे। वह दिव्यांग बोर्ड गए थे। मरीज बिना इलाज ही लौटते रहे।
लोहिया अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉ. नवनीत कुमार की ड्यूटी भी सोमवार को दिव्यांग बोर्ड में लगती है। वहां ईएनटी के मरीजों की संख्या न के बराबर होती है, लिहाजा वह दोपहर साढ़े 12 बजे तक ओपीडी में मरीज देखते, इसके बाद बोर्ड में जाते हैं। सोमवार को भी वह ओपीडी में भीड़ खत्म करने के बाद ही रवाना हुए।
संविदा समाप्त फिर भी ओपीडी सेवाएं दे रहे डॉक्टर
बालरोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप दीक्षित की आठ दिन पहले संविदा समाप्त हो चुका है। सोमवार को जब रूम का जायजा लिया तो ओपीडी में बीमार बच्चों का इलाज कर रहे थे। बताया जाता है कि वह रोजाना समय से मरीजों का इलाज करने आते हैं।
बालरोग विशेषज्ञ अवैतनिक सेवाएं देने आ रहे हैं। उनसे अस्पताल की नियमावली के बारे में लिखकर ले लिया है। इसके बाद ही इलाज करने की अनुमति दी है। आर्थो सर्जन की इमरजेंसी ड्यूटी कम लगाई है। दिव्यांग बोर्ड शासन की योजना में जाना जरूरी है। आर्थो सर्जन के लिए फिर रिमाइंडर लिखेंगे।
-डॉ. जगमोहन शर्मा, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।
फोटो-23, सर्जन के कमरे के बाहर पर्चा जमा करने के लिए लगी भीड़। (संवाद)