नवाबगंज स्थित रामलीला मैदान में बना अस्थाई नगरपंचायत कार्यालय। संवाद
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नवाबगंज। नवसृजित नगर पंचायत नवाबगंज में एक करोड़ रुपये की हेराफेरी सामने आई है। सफाई कर्मियों को तीन माह से मानदेय नहीं मिला और धनराशि भी खाते से निकल गई। नगर पंचायत में कूड़ा उठाने के लिए चार वाहन चल रहे हैं। इनके लिए फर्जी हस्ताक्षर कर रसीदों के माध्यम से 860 लीटर डीजल का पैसा भी निकाल लिया गया। वहीं, प्रभारी अधिशासी अधिकारी (ईओ) ने वर्तमान ईओ को 20 दिन बाद भी चार्ज नहीं सौंपा है। नगर पंचायत में अभी तक बोर्ड का गठन नहीं हुआ है। प्रशासक के कार्यकाल में यह हेराफेरी सामने आई है।
नगर पंचायत में ठेकेदार के माध्यम से 62 सफाई कर्मी लगाए गए हैं। तीन माह से काम लेने के बावजूद इन्हें मानदेय का भुगतान नहीं किया गया। सफाई कर्मियों ने अधिशासी अधिकारी से मानदेय दिलाने की मांग उठाई। सफाई कर्मी शिवम कुमार, विद्याराम, ओमवीर सिंह, रवीश कुमार, राजवीर, ब्रजेंद्र सिंह, राकेश कुमार, रंजीत कुमार, अर्जुन सिंह, राजवीर सिंह, मिरजेंद्र कुमार, राकेश कुमार, राहुल कुमार, विनोद कुमार, शिव कुमार आदि ने बताया कि उन लोगों का तीन माह का मानदेय नगर पंचायत कार्यालय के लिपिक ने निकाल लिया है। मानदेय न मिला तो सफाई का कार्य बंद कर दिया जाएगा। साथ ही शिकायत की कि नौकरी देने के नाम पर 20 से 30 हजार रुपये की मांग की जा रही है।
इस पर ईओ ने कार्यालय के रिकार्ड देखे तो पता चला कि सफाई कर्मियों का मानदेय निकाला जा चुका है। वहीं, एक युवक से नगर पंचायत कर्मी ने नौकरी के नाम पर 35 हजार रुपये लिए। बाद में मामला बिगड़ता देख युवक का पैसा वापस कर दिया गया।
ईओ सुभाष चंद्र राजपूत ने बताया कि 26 नवंबर को उनकी तैनाती हुई है। अभी तक पूर्व में तैनात ईओ मुन्ना कुमार ने न तो चार्ज दिया है और न ही कोई रिकार्ड उपलब्ध कराया। इससे काम बंद पड़े हैं। सफाई कर्मियों ने भी तीन माह से मानदेय न मिलने की शिकायत की है। नगर पंचायत में बिना वर्क ऑर्डर के काम भी हुए हैं। करीब एक करोड़ रुपये का घालमेल है। डीजल की खपत में भी गड़बड़ी है।