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Farrukhabad News: कागजों में डंपिंग स्थल पर पहुंच रहा 100 टन कूड़ा, भर रही सड़कों की खंती

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फर्रुखाबाद। नगर पालिका के जिम्मेदार कूड़ा उठान और निस्तारण में दोतरफा खेल कर रहे हैं। कागजों में 100 टन से अधिक कू़ड़ा करीब 10 किमी दूर डंपिंग स्थल पर पहुंच रहा है। जबकि चालक शहर से सटे गांवों में बन रही सड़कों की खंती कूड़े से भर रहे हैं। चालक कम दूरी तय करके डीजल बचा रहे हैं। पालिका के रिकार्ड में पूरा कूड़ा डंपिंग स्थल पर पहुंचाकर निस्तारण कराने का दावा किया जा रहा है।
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शहर से निकलने वाले कूड़े को डंपिंग स्थल पर पहुंचाने में पालिका के जिम्मेदारों और चालकों की शह पर बड़ा खेल है। कूड़ा लेकर जाने वाले वाहनों के चालक डीजल बचाने के चक्कर में इन दिनों कूड़ा रामनगर रमन्ना गुलजार बाग से ठाकुरद्वारा मंदिर जाने वाले मार्ग की खंती में उड़ेल रहे हैं। इसके अलावा बस अड्डा के आसपास मोहल्लों में लगे वाहन कू़ड़े को बद्रीविशाल डिग्री कालेज के सामने रामलीला गड्ढा में डाल रहे हैं। इससे शासन और एनजीटी के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं।
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कूड़े के वाहनों में रोजाना खर्च होता 50 हजार का डीजल
नगर पालिका कूड़ा उठाने में ट्रैक्टर, हूपर, डीसीएम, कॉम्पेक्टर, जेसीबी, जेसीबी ट्रैक्टरों का प्रयोग कर रही है। इनमें रोजाना 500 लीटर से अधिक डीजल खर्च करने का दावा कर रही है। इस कार्य में 50 हजार रुपये रोजाना खर्च हो रहे हैं। कूड़ा लेकर वाहनों को करीब 10 किमी दूर आमिलपुर डंपिंग स्थल पर ले जाने के निर्देश हैं। मगर इसका सच कुछ और ही है।
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कूड़ा पलटने के दूसरे दिन लगाई जाती आग
कूड़ा डालने के दूसरे दिन उसमें आग लगा दी जाती है। इससे कूड़े में आने वाली पॉलिथीन, कागज आदि को आग के हवाले कर दिया जाता है। इससे उठने वाला धुआं वहां गुजरने वाले लोगों को बेहाल कर देता है। आसपास खेतों में काम करने वाले किसानों को सबसे अधिक दिक्कतें होती हैं।
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एनजीटी के निर्देशों में 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान
फर्रुखाबाद। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की ओर से सड़क किनारे, खुले स्थानों, नदी या किसी भी अनधिकृत स्थान पर कू़ड़ा फेंकना जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध है। उल्लंघन करने पर पांच से 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। वायु प्रदूषण रोकने के लिए सड़क किनारे या खुले में कचरा जलाने पर पूरी तरह रोक है। निकायों को कचरा प्रबंधन के नियमों का कड़ाई से पालन करवाने के निर्देश हैं।
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