कई दिनों से बॉ विद्यालयों समेत परिषदीय विद्यालयों में फर्जी तरीके से निरीक्षण करने वाले दंपति को शिक्षक नेता ने पकड़कर बीएसए के हवाले किया। दंपति के लिखित माफीनामा पर बीएसए ने चेतावनी देकर छोड़ दिया। हालांकि शिक्षक बीएसए से दंपति के खिलाफ एफआईआर कराने की मांग करते रहे।
शनिवार को मोहम्मदाबाद क्षेत्र के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों ने शिक्षक नेता विजयबहादुर यादव को सूचना दी कि एक महिला और एक पुरुष अपने को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की डॉक्टोरल फैलो बताकर निरीक्षण कर रहे हैं। सूचना पर शिक्षक नेता मौके पर पहुंचे।
संशय होने पर शिक्षक नेता दोनों लोगों को बीएसए कार्यालय लेकर आए। महिला ने खुद को डॉक्टोरल फैलो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग बहादुरशाह जफरमार्ग नई दिल्ली बताया। पुरुष ने अपने को महिला का पति बताया ।
महिला ने बीएसए को बताया कि वे सीएनएस हरदोई डिग्री कॉलेज के सानिध्य में समाज शास्त्र में दरिद्र व्यक्तियों को एकत्र करने के लिए जिले में भेजे गए हैं। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि ये लोग विद्यालय में अनावश्यक रूप से रजिस्टरों को छीन कर उस पर अपनी आख्या अंकित करते हैं। इन लोगों ने प्रधान और एसएमसी अध्यक्ष को बताया कि एमडीएम की कन्वर्जन कास्ट 14 रुपये प्रति बच्चा के हिसाब से आती है।
इस पर कई प्रधान और एसएमसी अध्यक्षों का शिक्षकों से विवाद भी हुआ। फर्जी निरीक्षण करने वाले दंपति की सूचना मिलते ही बीएसए कार्यालय में शिक्षकों की भीड़ लग गई। शिक्षक बीएसए से दंपति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग करने लगे। उधर, महिला ने बीएसए को दिए गए पत्र में लिखा है कि शिक्षा का स्तर जानने के लिए वह परिषदीय विद्यालयों में जाती हैं। कई बार बीएसए से परमीशन के लिए पत्र लिखा गया लेकिन नहीं मिल सकी।
उन्होंने माफीनामा लिखते हुए कहा कि वह अब किसी भी विद्यालय में निरीक्षण करने नही जाएंगी। बीएसए संदीप चौधरी ने दंपति को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वह दोबारा अभिलेखीय निरीक्षण करते मिले तो एफआईआर करवाई जाएगी।