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नर्सिंग होम कमीशन के चक्कर में खेल रहे मरीजों की जान से

Wed, 21 Jan 2015 11:11 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
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नर्सिंग होम में मरीजाें की जेब कई कैंचियाें से काटी जा रही है। नर्सिंग होम एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, खून व दूसरी जांचाें में मोटा कमीशन खा रहे हैं। यह बाकायदा पैथालॉजी व सेंटरों का नाम लिखकर मरीजों को देते हैं। इन सेंटराें पर कटने वाली पर्ची में रेफर डाक्टर व नर्सिंग होम का बाकायदा नाम लिखा जाता है।
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नर्सिंग होम अच्छी सुविधा देने के नाम खुली लूट में लगे हैं। मरीज के अस्पताल में दाखिल होते ही इनका मीटर ऊपर हो जाता है। यह एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, यूरिन, खून, टूल की जांच के नाम पर पर्चे काटने लगते हैं। इन्हें तय कमीशन वाले सेंटराें पर भेजा जाता है। यह वह सेंटर हैं जहां नर्सिंग होम का मोटे कमीशन का कांट्रेक्ट है।

नर्सिंग होम मरीज के रेफ र पर्चे पर सेंटर का नाम भी लिखते हैं। सेंटर भी अपने यहां के कॉलम में रेफर डाक्टर व नर्सिंग होम का नाम दर्ज करते हैं। यह सेंटर जांच के बाद नर्सिंग होम का कमीशन (जो अच्छी खासी रकम होती है) पहुंचा देते हैं। रेफर सेंटर के अलावा कहीं दूसरी जगह से जांच करवाने पर रिपोर्ट फेल कर दी जाती है। इसके बाद दोबारा उसी सेंटर से जांच करवाने के लिए दबाव बनाया जाता है। इससे मरीज की जेब पर दोहरी मार पड़ती है।  ऐसा ही दवा के नाम पर होता है।
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इनकी लिखी दवा इनके सेटिंग वाले मेडिकल स्टोर (कमीशन सेंटर ) पर ही मिलेगी। जानकाराें की मानें तो शहर में नर्सिंग होम के कमीशन खोरी का यह धंधा रोज तीन लाख रुपये के करीब का है। इसमें सरकारी अस्पतालों से मरीजाें को प्राइवेट अस्पतालाें में पहुंचाने वाले दलालाें का भी कमीशन शामिल है।

30 से 35 फीसदी तक कमीशन
नर्सिंग होम का जांच सेंटराें से 30 से 35 फीसदी कमीशन तय होता है। सेंटर नर्सिंग होम को कांट्रेक्ट के मुताबिक भुगतान करते हैं। कोई डेली तो कहीं साप्ताहिक, पाक्षिक व मासिक भुगतान किया जाता है। मडिकल स्टोर संचालक भी ऐसे ही भुगतान करते हैं।

गैर जरूरी जांचें भी करवाई जाती हैं
नर्सिंग होम मोटा कमीशन बनाने के लिए मरीजाें को कई गैरजरूरी जांचें भी लिख देेेते हैं। इनका बीमारी से कोई ताल्लुक नहीं होता है। मरीज की जेब से ज्यादा माल निकलने से इनका कमीशन भी उतना ही तगड़ा होता जाता है।

क्या कहते जिम्मेदार 
सीएमओ डा. राकेश कुमार ने  बताया कि अगर यह गोरखधंधा चल रहा है तो इसे पकड़ पाना बहुत मुश्किल है। यूं भी ये उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। कोई शिकायत भी करता है तो जांच पुलिस करेगी।
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