शीघ्र ही बच्चों के बैंक खाते में आरटीजीएस से स्कॉलरशिप की राशि जमा होगी।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत मिले बजट वित्तीय वर्ष 2015-16 में 33.50 करोड़ रुपये में से विभाग 30 मार्च तक केवल 14 करोड़ और 38 लाख रुपये ही खर्च कर सका है। तकरीबन ढाई करोड़ रुपये के बिल कोषागार में 31 मार्च को पेश किए गए हैं। लगभग 15 करोड़ रुपये इस योजना को संचालित करने के लिए आए बजट में से बच गए हैं।
जिले की 603 ग्राम सभाओं में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए केंद्र सरकार ने जो बजट दिया था। उस बजट को विभागीय अधिकारी खर्च नहीं कर सके हैं। अधिकारियों की मानी जाए तो ग्रामीणों के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखते हुए और चरणबद्ध योजनाएं चलाकर पैसा खर्च किया गया है।
राजकीय कोषागार में पेश किए गए बिलों पर गौर किया जाए तो जाहिर है कि एक साल में इस योजना के तहत मिले बजट को खर्च करने के बिल बाऊचर फरवरी माह में ही 14 करोड़ 38 लाख रुपये डालकर राजकीय कोषागार से चेक प्राप्त कर ली गई। फरवरी माह से लेकर अब तक तकरीबन तीन करोड़ के बिल कोषागार में पेश किए गए हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी राकेश कुमार का कहना है कि यह खर्चा पूरे साल का है। 15 करोड़ रुपया शेष बच गया है, जिसे केंद्र या प्रदेश सरकार को समर्पित करने की जरूरत नहीं है। अगले वर्ष जो एनआरएचएम का बजट दिया जाएगा। उनमें यह पैसा लेस कर दिया जाएगा। उनका कहना है कि इतना जरूर है कि इस पैसे को अग्रिम आदेशों तक खर्च नहीं किया जा सकता। अगला बजट मिलने के बाद ही इसे खर्च किया जा सकता है।