बीते वित्तीय वर्ष में मिला बजट कहीं घी घना, कहीं मुट्ठी भर चना, तो कहीं वह भी मना वाली कहावत को चरितार्थ कर गया है। मनरेगा मजदूरों को जहां बजट के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं मिली है, वहीं सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन का बहुत बड़ा हिस्सा अधिकारियों को राज्य सरकार को समर्पित करना पड़ा है।
जिले में कार्यरत तकरीबन 90 हजार जाबकार्ड धारक मनरेगा मजदूर मौजूदा समय में कार्य पर हैं। इन मजदूरों को होली के अवसर पर मजदूरी न मिलने के कारण इनकी होली फीकी रही। आगामी वर्ष में भी समाचार लिखे जाने तक मनरेगा के मद में बजट के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं आई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अधीन कार्यरत कर्मचारियों को 31 मार्च तक का वेतन मिल जाने के बाद 17 लाख रुपया बच गया है, जिसे राज्य सरकार को समर्पित किया गया है। यही नहीं जेल, शिक्षा और चिकित्सा विभागों में करोड़ों रुपया बच गया है। लेकिन दिन भर मजदूरी कर बच्चों का पेट पालने वाले गरीब मजदूरों के खाते में नए वित्तीय वर्ष में एक छदाम नहीं पहुंच सकेगी।
जहां मनरेगा मजदूरों के खाते में एक पैसा नहीं गया है, वहां कई सरकारी विभाग घी घना की तरह मालामाल हो गए हैं। सूचना विभाग जैसे कई विभाग हैं जो एक लाख से ज्यादा बजट नहीं पा सके, मुट्ठी भर चने से ही उन्हें संतोष करना पड़ रहा है। परियोजना निदेशक डा. डीआर विश्वकर्मा ने बताया कि मनरेगा के तहत बजट नहीं आया है।