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जख्मों पर नहीं लगा मुआवजे का मरहम

Sun, 12 Apr 2015 11:45 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, फर्रुखाबाद
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ओलावृष्टि और बारिश से फसल बर्बाद होने से किसान पूरी तरह टूट गया है। प्रदेश सरकार किसानों को आर्थिक सहायता देने का दावा कर रही है, पर हकीकत इससे परे है। ‘अमर उजाला’ ने रविवार को लोहिया ग्रामों में पहुंचकर जब पीड़ितों से मुआवजे की चर्चा की तो उनका दर्द छलक आया।
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किसानों ने कहा कि आर्थिक सहायता मिलना तो दूर सर्वे के नाम पर भी खाना पूरी हो रही है। राजस्वकर्मी सड़क से ही फसल का सर्वे कर रहे हैं। कई जगह तो अफसर और कर्मचारी सर्वे करने पहुंचे ही नहीं। किसान कर्ज में डूब गया है। बेटी की शादी की चिंता भी सता रही है।

लोहिया ग्राम जीरागौर की आबादी करीब दो हजार है। गांव के मेराज, रईस, लईक, राशिद, शमी मोहम्मद, जुल्फिकार, बकारत, शाहिद हुसैन, चांदमियां, सगीर, इमरान और सुमेर सिंह का कहना है कि बेमौसम की बारिश और ओलावृष्टि ने गेहूं की फसल बर्बाद कर दी।
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पहले जहां एक बीघा में चार से पांच क्विंटल गेहूं निकलता था, इस बार मात्र एक से डेढ़ क्विंटल गेहूं निकल रहा है। गेहूं काला हो गया है। दाना हल्का और खराब है। ग्रामीणों ने बताया कि उन पर केसीसी का ऋण है। फसल बर्बाद हो गई, अब ऋण चुकाने की चिंता सता रही है।

लेखपाल सर्वे करने भी नहीं आया। लोहिया ग्राम उगरापुर के नफीस अहमद, रामनाथ, छविनाथ, अहिबरन, मैकूलाल, पातीराम, महेश्वर, प्रताप सिंह, परशुराम, बादशाह और रामप्रकाश का कहना है कि इस बार गेहूं की लागत निकलना मुश्किल है। कोई भी लेखपाल और राजस्वकर्मी सर्वे करने नहीं आया है।

लोहिया ग्राम फगुना अतनपुर में फसल बर्बाद होने से किसान कर्ज में डूब गए हैं। किसानों का कहना है कि आर्थिक सहायता मिलनी भी मुश्किल है। बारिश और ओलावृष्टि से गांव में गेहूं की फसल 50 से 60 फीसदी बर्बाद हुई है लेकिन कोई भी सर्वे करने नहीं आया है।

विश्वनाथ, रामविलास, सुरेशचंद्र, पुत्तूलाल, राकेश कुमार और अमित कुमार का कहना है कि ओलावृष्टि और बरसात से आलू व गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है। किसानाें का कहना है कि जिला प्रशासन का कोई भी अफसर गांव में झांकने तक नहीं आया है।

किसान संतोष शर्मा ने बताया 300 रुपये क्विंटल आलू बिका है। लागत 11 हजार रुपये प्रति बीघा आई थी। संतोष कुमार और रामऔतार ने बताया कि उन्होंने केसीसी ऋण लिया था। फसल बर्बाद होने से ऋण चुकाने में दिक्कत आएगी। कहा कि खेतों में आलू पड़ा है। मजदूरी देने तक के लिए पैसे नहीं हैं।

लोहिया ग्राम भागीपुर उमराह में फसल बर्बाद होने से कई किसान कर्ज में डूब गए है। कुछ किसानों को बेटियों की शादी की चिंता सता रही है। चरन सिंह ने बताया कि उसने 8 बीघा गेहूं बोया था। 40 हजार रुपये केसीसी से ऋण लिया था। बेटी राधा का रिश्ता तय कर दिया था।

सोचा था कि फसल अच्छी होगी तो ऋण भी चुका देंगे और बेटी की शादी भी कर देंगे। बेटी राधा की 30 अप्रैल को शादी है। समझ में नहीं आ रहा कि कैसे व्यवस्था होगी। गांव के ही सोबरन सिंह ने बताया कि एक लाख रुपये केसीसी से ऋण लेकर 18 बीघा गेहूं की फसल बोई थी। फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, कर्ज कैसे चुकाएंगे।

रामनिवास का कहना है कि तीन बीघा में खड़ी गेहूं की फसल बारिश से बर्बाद हो गई। रामनाथ कहते हैं कि डेढ़ बीघा गेहूं की फसल करीब 60 फीसदी बर्बाद हो गई। रामप्रेम का कहना है कि 15 हजार रुपये का केसीसी ऋण लेकर आठ बीघा गेहूं की फसल बाई थी।

बारिश से फसल नष्ट हो गई। हरनाथ ने बताया कि उन्होंने एक लाख रुपया ऋण लिया था। तंबाकू और गेहूं की फसल की थी लेकिन फसल नष्ट हो गई। रूपराम महावीर, खुशीराम, अजय पाल नत्थू और छोटे ने बताया कि कोई भी उनके खेतों में सर्वे करने नहीं आया। लेखपाल रामलखन पांडेय सड़क से ही सर्वे कर गए।
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