लोहिया अस्पताल के पीकू वार्ड में खाली पड़ी डॉक्टर की कुर्सी। संवाद
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फर्रुखाबाद। कोरोना के मरीजों की संख्या भले ही तेजी से बढ़ रही हो, मगर लोहिया अस्पताल के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू) वार्ड में डॉक्टर नहीं बैठते। ऐसे में स्टाफ नर्स और वार्ड ब्वॉय ही अपनी सीटों पर मुस्तैद दिखाई देते हैं। इतना ही नहीं संक्रमण के दौर में वार्ड परिसर में आने-जाने की कोई मनाही नहीं है।
लोहिया अस्पताल में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के लिए 40 बेड तैयार किए गए हैं। इनमें से 12 पर वेंटीलेटर हैं। अन्य सभी बेडों पर प्लांट से पाइपलाइन से ऑक्सीजन और कन्संट्रेटर भी लगाए गए हैं। मशीनरी सिस्टम दुरुस्त होने के बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों को लेकर दिक्कत है। यहां तीनों शिफ्टों में डॉक्टरों की तैनाती की गई है, मगर डॉक्टर सीट पर मिल जाएं यह तो मरीज की किस्मत ही है।
पीकू वार्ड में शनिवार सुबह आठ से दो बजे तक की शिफ्ट में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय सूद की ड्यूटी थी। दोपहर एक बजे उनके कमरे का गेट तो खुला था, मगर सीट खाली थी। वार्ड ब्वॉय राजू ने बताया कि साहब राउंड पर गए हैं। जब वार्ड में जाकर देखा तो एक भी बेड पर मरीज भर्ती नहीं था। इससे साफ हो गया कि डॉक्टर अस्पताल में नहीं थे। एक स्टाफ नर्स ने बताया कि शुक्रवार को तीन मरीजों की छुट्टी हुई है। इसके बाद कोई भी भर्ती नहीं हुआ है।
कई चक्कर लगाने के बाद भर्ती होता मरीज
पीकू वार्ड में किसी बच्चे को भर्ती करने के लिए मरीज के तीमारदार को इमरजेंसी और पीकू वार्ड के कई चक्कर लगाने होते हैं। व्यवस्था के अनुसार मरीज इमरजेंसी में जाएगा। वहां रजिस्टर में नाम लिखवाकर पीकू वार्ड जाएगा। वहां डॉक्टर को दिखाकर भर्ती की सहमति लेगा। इसके बाद फिर इमरजेंसी में आकर भर्ती की कागजी कार्रवाई पूरी करके फाइल तैयार करवाकर कागज पीकू वार्ड ले जाएगा। तब कहीं मरीज भर्ती हो सकेगा। इस दौरान यदि इमरजेंसी और पीकू वार्ड का कोई डॉक्टर इधर-उधर हुआ, तो इंतजार करना मजबूरी है।
वर्जन...
डीएम ने पीकू वार्ड में डॉक्टर को बैठने के निर्देश दिए हैं। यदि डॉक्टर नहीं बैठते हैं तो शिकायत मिलने पर डीएम को अवगत कराएंगे। किसी भी मरीज को दिक्कत हो तो वह शिकायत करे।- डॉ. राजकुमार गुप्त, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।
लोहिया अस्पताल के पीकू वार्ड में खाली पड़े बेड। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD