बढ़पुर में झूलते बिजली के तार। संवाद
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फर्रुखाबाद। बिजली विभाग के अफसरों ने खाते में पैसा होने के बाद भी शहरी क्षेत्र में काम नहीं कराए। लापरवाही इस कदर रही कि जिन कामों का अनुमोदन डीएम ने कर दिया था, उनके भी टेंडर जारी नहीं किए गए। इसी का नतीजा रहा कि गर्मी में बिजली व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है।
बकायेदारी में कनेक्शन कटाने के बाद राजस्व वसूली के लिए आरसी जारी की जाती है। इस आरसी से जो वसूली होती है उसका कुछ हिस्सा नवीन जिला विद्युत विकास निधि में जमा होता है। इस निधि के खाते का संचालन डीएम और अधीक्षण अभियंता के संयुक्त हस्ताक्षर से होता है।
वर्ष 2020 में विद्युत विकास निधि के एक करोड़ रुपये से शहर और ग्रामीण क्षेत्र में बिजली व्यवस्था सुधारने का निर्णय लिया गया। ग्रामीण क्षेत्र के 48 स्कूलों, दो गांवों में घरों के ऊपर से निकली एचटी व एलटी लाइन को शिफ्ट करने के लिए करीब 30 लाख रुपये का इस्टीमेट बनाया गया था।
शहरी क्षेत्र में जर्जर तार व बंच केबल बदलने समेत 25 काम कराने के लिए इस्टीमेट बना था। तत्कालीन जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने अगस्त 2020 में काम कराने के लिए अनुमोदन कर दिया, लेकिन टेंडर नहीं निकाले गए। डीएम ने नाराजगी जताई तो 20 स्कूलों और एक गांव में विद्युत लाइन को शिफ्ट कराने का टेंडर अधीक्षण अभियंता कार्यालय से निकाला गया। इसमें कुछ काम हो गए हैं।
इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्र के 29 और शहरी क्षेत्र के 25 काम कराने के लिए कोई टेंडर नहीं निकाला गया। यही कारण रहा कि शहर में निर्बाध विद्युत आपूर्ति देने के लिए उपकरणों को दुरुस्त रखने का कोई काम नहीं हुआ। इसका असर गर्मी बढ़ते ही दिखाई देने लगा है। तापमान 40 के पार जाते ही जर्जर तार और बंच केबल टूट रहे हैं और बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है।