फर्रुखाबाद। शहरी लोगों को सेहतमंद रखने के लिए बनाए गए पार्कों को खुद की सेहत सुधारने की दरकार है। बदहाली ऐसी कि झूले, टहलने का पाथ, फुलवारी के स्थान पर कहीं आवारा तो कहीं पालतू जानवर बांधे जा रहे हैं। झाड़ झंखाड़ और कूड़ा डाला जा रहा है।
आसपास के लोग अपने वाहन भी खड़े कर रहे हैं। पटेल पार्क के सुंदरीकरण के लिए डेढ़ साल पहले ठेका हुआ, लेकिन काम शुरू होने के बाद भी बंद कर दिया गया। पार्क की बदहाली के कारण लोग सुबह और शाम की सैर सड़कों पर करने के लिए मजबूर हैं।
शहर का सबसे पुराना और बड़ा पटेल पार्क कई दशक से बदहाली का शिकार है। कभी आकर्षण का केंद्र रहे इस पार्क में आज कूड़ा, जलभराव, गंदगी और अराजकतत्वों का जमावड़ा है। आवारा मवेशियों का डेरा रहता है।
करीब डेढ़ साल पहले पार्क के सुंदरीकरण के लिए 1.30 करोड़ रुपये का ठेका हुआ। इसमें टहलने का पाथ, फुलवारी, लाइटिंग, बाउंड्रीवाल की मरम्मत आदि काम होना था। ठेकेदार ने काम भी शुरू कराया, मगर चंद ईंटें डालने के बाद बंद हो गया। अब पालिका और प्रशासन की अनदेखी के चलते सात माह से कोई काम नहीं हुआ।
इसी तरह आवास विकास कालोनी के 6बी के पार्क की स्थिति भी बदहाल है। पार्क में झाड़ियां खड़ी हैं। खाली स्थान में पालतू जानवर बांधे जा रहे हैं। पार्क में आसपास के बाशिंदों के वाहन खड़े होते हैं। पार्कों की दुर्दशा के चलते बच्चे, बुजुर्ग न तो टहल पा रहे और न ही मनोरंजन करके सेहत सुधार पाते हैं।
अतुल पांडेय। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD
राजू। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD
शहर की आवास विकास कालोनी के पार्क में बंधे मवेशी व खड़े वाहन। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD