महोबा। शहर के रहने वाले एक नटवरलाल ने किसी दूसरे के आवास योजना के अर्ध निर्मित मकान को पेंट कराकर उसे महिला को आठ लाख रुपये में बेच दिया। मकान बेचने के लिए एक व्यक्ति को फर्जी तरीके से मकान मालिक बनाकर रजिस्ट्रार ऑफिस में पेश किया गया। मकान खरीदने वाली महिला को जब धोखाधड़ी का पता चला तो उनका पूरा परिवार दंग रह गया। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने तीन नामजद व एक अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
मोहल्ला रामनगर निवासी सुमन देवी ने एसपी शशांक सिंह को दिए शिकायती पत्र में बताया कि 13 जनवरी 2026 को उनके ससुर मुल्ला साहू के पास जकरियापीर मोहल्ला निवासी आशीष गुप्ता आया था। उसने बताया कि उसके पास एक प्लॉट है, जिसे वह 15 लाख रुपये में दिला देगा। दाम अधिक लगने पर ससुर ने प्लॉट खरीदने से मना कर दिया। आरोप है कि 18 जनवरी 2026 को आशीष गुप्ता ने जालसाजी करते हुए एक व्यक्ति जिसने अपना नाम माधव प्रसाद बताया, उससे, ससुर को फोन कराया और अपनी पत्नी की किडनी की समस्या बताते हुए प्लाट आठ लाख रुपये में बेचने का प्रस्ताव रखा। ससुर ने आठ लाख में प्लाट खरीदने पर सहमति जताई। इसके बाद आशीष प्लाट के अभिलेख लेकर ससुर के पास पहुंचा और उन्हें दिखाया। बताया कि प्लाट अर्ध निर्मित मकान है। आरोपियों ने इस मकान में अंकित आवास योजना के विवरण को पेंट करा दिया।
22 जनवरी को आशीष गुप्ता ने फिर से अभिलेख उन्हें दिखाए जो पूरी तरह से सही लग रहे थे। इसके बाद 23 जनवरी को आशीष गुप्ता, उसका भाई नीरज गुप्ता और एक व्यक्ति जिसका नाम माधव प्रसाद बताया गया। उसे लेकर रजिस्ट्री आफिस पहुंचे और रजिस्ट्री कराई। इस दौरान माधव प्रसाद की ओर से अपना आधार कार्ड आदि अन्य अभिलेख प्रस्तुत किए गए। अर्ध निर्मित मकान की कीमत आठ लाख रुपये थी। जिसमें पांच लाख रुपए सुमन ने माधव प्रसाद व आशीष गुप्ता को दिए और तीन लाख रुपये का एक चेक दिया। 24 जनवरी को आशीष चेक लेकर वापस घर आया और बताया कि बैंक बंद है, इसलिए उसे नकद पैसा दे दिया जाए। जिस पर उसे तीन लाख रुपये की व्यवस्था करके दे दिया गया। प्लाट खरीदने पर उन्होंने मकान के दरवाजे पर ताला बंद कर दिया। 16 जनवरी को एक व्यक्ति ने मकान का ताला तोड़ा और घर में प्रवेश किया तो उन्हें इसकी जानकारी हुई। सुमन व परिजन मौके पर पहुंचे तो पता चला कि ताला तोड़ने वाला व्यक्ति माधव प्रसाद है और वह मकान उसका है जबकि सुमन ने जिससे मकान खरीदा वह माधव प्रसाद कोई दूसरा व्यक्ति था। असली माधव प्रसाद ने अपने प्रमाणित अभिलेख भी दिखाए और बताया कि यह मकान उसका है व प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से निर्माण चल रहा है। यह सुनकर वह दंग रह गए।
असली माधव प्रसाद ने बताया कि उनके साथ ठगी हुई है। सुमन ने बताया कि आशीष गुप्ता, नीरज गुप्ता व एक अन्य अज्ञात व्यक्ति ने साजिश के तहत फर्जी अभिलेख के बलबूते उनसे आठ लाख रुपये की ठगी की है। मकान को इसलिए पेंट किया गया था ताकि किसी को पता न चले कि यह पीएम आवास योजना के तहत बन रहा है। पुलिस अधीक्षक ने प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए। कोतवाली प्रभारी मनीष कुमार पांडेय ने बताया कि आशीष गुप्ता, नीरज गुप्ता, माधव प्रसाद व एक अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। जांच कराई जा रही है।