डा. राममनोहर लोहिया पुरुष और महिला अस्पताल की ओपीडी सुबह आठ बजे नहीं खोली गईं। इससे पहुंचे मरीज लौटने लगे। इमरजेंसी से भी लौटा दिया गया। सुबह दस बजे भाजपा सांसद मुकेश राजपूत के प्रतिनिधि दिलीप भारद्वाज अपनी मां को दिखाने पहुंचे। उन्हें ताले बंद मिले, तो इमरजेंसी गए।
ड्यूटी पर तैनात डा. अभिषेक चतुर्वेदी ने उन्हें ओपीडी में ही दिखाने को कहा। दोबारा ओपीडी पहुंचे। ताले नहीं खुले, तो सीएमओ और प्रशासनिक सीएमएस डा. राजेश तिवारी को फोन किया।
उन्होंने नाराजगी जताई, तो साढ़े 11 बजे गेट खुला और मरीज अंदर पहुंचे। 12 बजे के करीब पर्चे बनने शुरू हुए और एक बजे बंद हो गए। इस दौरान 90 बुखार-खांसी तथा 30 पर्चे एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने को बनाए गए। फ्लू कॉर्नर में डाक्टर मनोज पांडेय बैठे।
उन्होंने मरीजों को देखकर दवाएं लिखीं, मगर दवा काउंटर नहीं खुला। एक बजे के करीब ओपीडी बंद हो गई। सांसद प्रतिनिधि मां को बिना दिखाए ही लौट गए।
महिला अस्पताल के बाहर मुख्यमंत्री के ट्वीट को प्रिंट करके चिपका दिया गया। इसमें लिखा था कि सरकारी अस्पतालों में केवल इमरजेंसी सेवाएं प्रदान की जाएं, गैरजरूरी ओपीडी व जांचें 31 मार्च तक स्थगित रखी जाएं, जिससे अस्पतालों में अनावश्यक भीड़ न हो।
अस्पताल पहुंची सुनीता ने बताया कि वह दो घंटे से खड़ी हैं। कोई सुनने वाला नहीं। अब गेट खुला है, तो दवाई नहीं मिल रही है।
संतोष कुमार ने बताया कि उन्हें खांसी-जुकाम है। वह सुबह से आ गए थे, मगर अस्पताल बंद होने से परेशान रहे। गरीब लोग कहां जाएंगे दिखाने।
पूजा कहती हैं कि पर्चा बना, तो दवाई नहीं मिली। कम से कम ओपीडी में काम तो होना चाहिए। खांसी-बुखार की भी की दवाई नहीं मिल रही।
सरोज जल्दी ही घर से दवा लेने निकली थीं। बोलीं, कोई सुनने वाला नहीं है। एक घंटे को अस्पताल खुला तो न डाक्टर मिले और न दवाई। कोई फायदा नहीं है।
‘मुख्यमंत्री के आदेश के चलते ओपीडी को बंद करने का निर्णय लिया गया। अब कुछ व्यवस्था की जाएगी। वाकई लोगों को दिक्कत तो हो रही है।’-डा. राजेश तिवारी, प्रशासनिक सीएमएस, लोहिया अस्पताल।