अमृतपुर। तहसील प्रशासन ने बाढ़ राहत में भी खेल कर दिया है। एक ही जिले में नाव व मोटर बोट का टेंडर दो तरह का हुआ है। स्थानीय नाव संचालकों के बजाय दूसरे जिले के ठेकेदार से नाव और मोटर बोट का अनुबंध ऊंचे दामों में किया है। इसको लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
गंगा व रामगंगा में बाढ़ आने से पहले तहसील प्रशासन बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए तैयारियां पहले से करता है। इस बार तहसील सदर में तीन टेंडर डाले गए थे। जिसने कम में रेट का टेंडर डाला उसी को तहसील प्रशासन ने नाव व मोटर बोट का ठेका दिया। तहसीलदार विक्रम सिंह ने बताया कि चालक सहित मोटर बोट का अनुबंध 2,500 रुपये प्रतिदिन, नाव का 400 रुपये तथा नाविक का 466 रुपये प्रतिदिन की दर से किया गया है।
वहीं, अमृतपुर तहसील प्रशासन ने चालक सहित मोटर बोट 3,200 रुपये प्रतिदिन और नाव-नाविक सहित 1,066 रुपये प्रतिदिन की दर से अनुबंध किया है। प्रशासन ने स्थानीय नाविकों से अनुबंध न करके बदायूं जिले के कछला घाट के एक ठेकेदार से अनुबंध किया है। स्थानीय नाविकों का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ के दौरान फर्रुखाबाद की नावें और नाविक दूसरे जिलों में राहत कार्यों के लिए जाते हैं। ऐसे में जिले में नावों और नाविकों की उपलब्धता पहले से रहती है। स्थानीय नाव मालिकों को मौका देने के बजाय दूसरे जिले के ठेकेदार को अनुबंध क्यों दिया गया। दो तहसीलों में एक जैसे कार्य के लिए अलग-अलग दरें तय होने से प्रशासन की मंशा पर लोग सवाल उठा रहे हैं। जिलाधिकारी अंकुर लाठर ने बताया कि इस मामले को दिखवाया जाएगा।