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साधु की समाधि पर विवाद, दो पक्ष आमने-सामने

Sat, 04 Mar 2017 11:15 PM IST
अमर उजाला/फर्रुखाबाद
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ग्रामीणों को समझाते एसडीएम सुरेंद्र सिंह। - फोटो : amarujala
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 साधु की समाधि को लेकर दो अलग-अलग समुदाय के लोग शनिवार को आमने-सामने आ गए। इसे लेकर पुलिस एवं प्रशासन के आलाधिकारी मौके पर पहुंच गए। स्थानीय लोगों ने आपसी बातचीत कर मामला रफा-दफा कर दिया।
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गांव रायपुर के निकट बहोरिखपुर-मोहम्मदाबाद मार्ग पर त्यागी प्रेमदास महंत का आश्रम करीब 30 साल से बना है। 27 फरवरी को महंत की हालत बिगड़ गई तो उन्हें लोहिया अस्पताल लाया गया। लोहिया अस्पताल में चिकित्सकों ने उन्हें सैफई मेडिकल कालेज के लिए रेफर कर दिया।

शनिवार सुबह करीब पांच बजे महंत निर्वाण को प्राप्त हो गए। उनके पार्थिव शरीर को गांव रायपुर के रहने वाले बृजेश और विजय सिंह लेकर आश्रम पहुंचे। महंत को पंचतत्व में विलीन करने के बाद उनकी समाधि के लिए शमसुल निवासी बंथलशाहपुर के खेत में व्यवस्था कराई जाने लगी। इसको लेकर शमसुल ने विरोध किया।
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सूचना पर महंत श्याम सिंह मुबारिकपुर, बाबा हरदास, सतीश दास निवासी कमालपुर, प्रेमदास, सेवादास निवासी सकरावा और त्रिवेमीदास बेहटा समेत आधा सैकड़ा महंत मौके पर पहुंच गए। स्थिति तनावपूर्ण देखते हुए किसी ने यूपी 100 पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने यहां की स्थिति को देखते हुए आलाधिकारियों को सूचना दी।

थाना जहानगंज के इंचार्ज मोहम्मदाबाद में मौजूद थे। इसलिए आनन-फानन कमालगंज के थानाध्यक्ष सुनील यादव को दलबल के साथ मौके पर भेजा गया। एसडीएम सदर सुरेंद्र सिंह भी अमले के साथ मौके पर पहुंच गए।


इस बीच संत, महात्माओं और शमसुल के पक्ष से वहां पहुंचे हसमतजंग खां, राजू खां समेत कई लोगों ने आपस में बैठकर मामला सुलझा लिया। लोगों ने मंदिर के साइड में बाबा की समाधि बनाने के लिए हामी भर दी। इसके बाद त्यागी प्रेमदास के शिष्य मुकेश दास ने उन्हें मुखाग्नि दी।


इंशा खां ने दी थी मंदिर के लिए जगह
जहानगंज। त्यागी प्रेमदास बंगाल के मूल निवासी थे। वह 30 साल से अपने शिष्यों के साथ यहां रह रहे थे। जब महंत प्रेमदास यहां आए थे तो बंथलशाहपुर के रहने वाले इंशा खां नेे ही उन्हें मंदिर बनाने के लिए अपने खेत में जगह दी थी। इसे लोग आज भी गंगा जमुनी तहजीब की मिशाल के तौर पर पेश करते हैं।
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