निर्माणाधीन नटराज भवन। संवाद न्यूज एजेंसी
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साहित्य की दीपशिखा महीयसी महादेवी वर्मा, बंदिश की ठुमरी के फनकार ललन पिया और भारतीय संगीत में तबले के छह घरानों में अपना स्थान स्थापित करने वाले हाजी विलायत अली की जन्मस्थली फर्रुखाबाद में अब साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियां पूरे शान-ओ शौकत से हो सकेंगी।
यह शासन-प्रशासन की दया से नहीं बल्कि इस सांस्कृतिक नगरी की जन चेतना से संभव होने जा रहा है। शहर के कुचिया मोहल्ले में विविध गतिविधियों के आयोजनों व युवा पीढ़ी को इससे जोड़ने के लिए नटराज भवन बनवाया जा रहा है।
संस्कार भारती के कानपुर प्रांत के संरक्षक व ललन पिया-हाजी विलायत अली संगीत समिति के अध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश मिश्र कंचन को यह टीस थी कि साहित्यिक, सांस्कृतिक व भारतीय संगीत में देश को बहुत कुछ देने वाली फर्रुखाबाद नगरी नई पीढ़ी को इस विरासत से रूबरू नहीं करा पा रही है।
कोई ऐसा मंच नहीं है जहां विविध गतिविधियां व कार्यक्रम हो सकें। बढ़ती अवस्था की परवाह किए बिना उन्होंने इस दिशा में कार्य करने का संकल्प ले लिया। महादेव प्रसाद स्ट्रीट कुचिया मोहल्ले में उपनेश्वरनाथ शिवालय परिसर में खाली जमीन पर नटराज भवन के लिए उन्होंने विचार बनाया। देखते ही देखते जन चेतना में सरोकारों की माला गुथने लगी।
कई लोग इस अनूठी पहल में भागीदार बनने लगे। महाविद्यालय से 1998 में सेवानिवृत्त साहित्यकार डॉ. कंचन ने अपनी एक वर्ष की पेंशन 5.46 लाख रुपये इस भवन के निर्माण में लगा रहे हैं। उनकी साधन देख मोहल्ले के साथ ही शहर व जिले के कुछ अन्य लोग भी सहयोग को आगे आए। मोहल्ले के कई युवा आर्थिक सहयोग के साथ निर्माण कार्य की देखरेख करते हैं।
600 वर्गफुट से अधिक के आकार वाले नटराज भवन को जल्द से जल्द पूरी तरह तैयार कर उद्घाटन की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि यज्ञ शाला का भी जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। नटराज भवन में नई पीढ़ी को भारतीय साहित्य, संस्कृति, संगीत, विरासत व वैभव से रूबरू कराने व प्रशिक्षण आदि की भी व्यवस्था होगी।