हर साल की तरह इस बार भी 26 फरवरी को जुलूस-ए-मौला अली शान-ओ-शौकत से निकाला जाएगा। आयोजकों ने तैयारियों को अंतिम रूप देने के बाद जुलूस के बारे में जानकारी दी।
शहर के घेर शामू खां स्थित आफताब हुसैन के निवास पर बुधवार को प्रेसवार्ता में आफताब हुसैन ने बताया कि जुलूस की प्रशासन से अनुमति मिल गई है।
जुलूस 26 फरवरी को शाम 5 बजे लाल दरवाजा स्थित वारसिया मस्जिद से शुरू होगा। यहां से घुमना चौक, पक्कापुल, तिकोना होते हुए रकाबगज स्थित दरगाह हजरत अब्बास पर जलसे में तब्दील हो जाएगा।
वहां शोरा इकराम के कलाम होंगे। कोरोना को देखते हुए जुलूस में केवल तीन गाड़ियां, पांच घोड़े और झंडे, बैनर रहेंगे। जुलूस में दूरी बनाकर रखी जाएगी।
सुनहरी मस्जिद के सेक्रेटरी मुमताज हुसैन ने बताया कि इसी दिन हजरत अली का जन्म हुआ। मौलाना फरहत अली जैदी ने कहा कि इस जुलूस की नींव जनाब आफताब हुसैन ने रखी।
तभी से जुलूस हर साल पूरी शान-ओ-शौक़त से निकलवा रहे हैं। यह जुलूस अनेकता में एकता का परिचायक है। सभी धर्मों के धर्म गुरु साथ रहते हैं। इस दौरान सदाकत हुसैन सैंथली आदि मौजूद रहे।