कमालगंज। मेजर एसडी सिंह विश्वविद्यालय में सोमवार को महर्षि चरक जयंती समारोह हुआ। कहा गया कि महर्षि चरक प्राचीन भारत के महान चिकित्सक व आयुर्वेद के मूल प्रवर्तकों में से एक थे। उनकी कालजयी रचना चरक संहिता इंटरनल मेडिसिन (काय चिकित्सा) का आधारभूत ग्रंथ है। इस ग्रंथ में आहार, व्यायाम व जीवनशैली पर खास जोर दिया गया है।
कार्यक्रम का शुभारंभ डीन डॉ. एके बाथम, उप प्राचार्य डॉ. विनायक किन्नाल, डॉ. नवीन कुमार बीवी एवं डॉ. राकेश भदौरिया ने मां सरस्वती एवं महर्षि चरक की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर किया। डीन ने कहा कि महर्षि चरक ने आयुर्वेद को व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान करने में विशेष योगदान दिया।
उप प्राचार्य ने कहा कि चरक संहिता में मरीजों की सेवा को धन कमाने से ऊपर रखा गया है। प्राचीन चिकित्सा विज्ञान में योगदान के लिए चरक को फादर आफ द मेडिसिन माना जाता है। डॉ. कमलेश कुमार, डॉ. राकेश भदौरिया एवं डॉ. रीति यादव ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। छात्रों ने त्वरित सोच के आधार पर सटीक उत्तर देने की कुशलता दर्शाई। (संवाद)