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धूमधाम से मनाया महर्षि वाल्मीकि का प्रकट्य दिवस

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महर्षि बाल्मीकि मंदिर में सजे स्वरूप। - फोटो : FARRUKHABAD
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धूमधाम से मनाई महर्षि वाल्मीकि जयंती
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फर्रुखाबाद। महर्षि वाल्मीकि की जयंती समारोह शनिवार को धूमधाम से मनाया गया। श्रीरामचरित मानस पाठ, हवन पूजन के बाद श्रीराम, लक्ष्मण, सीता आदि देवी-देवताओं की झांकियां सजाई गईं। वक्ताओं ने वाल्मीकि के जीवन पर प्रकाश डाला।
महर्षि वाल्मीकि संस्कार समिति के संयोजक करतार सिंह वैष्णव वाल्मीकि की देखरेख में दरीबा पश्चिम वाल्मीकि आश्रम में सुबह गंगा स्नान के बाद कार्यक्रम शुरू हुआ। मानस पाठ किया गया। हवन पूजन हुआ। आश्रम में श्रीराम, लक्ष्मण, सीता, लवकुश, हनुमान, शंकर, सरस्वती, काली, गणेश आदि देवी देवताओं के स्वरूपों को सजाकर झांकियों का प्रदर्शन किया।
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समिति संयोजक ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि रामायण में 100 करोड़ श्लोक हैं। इसके बाद ही अन्य ग्रंथों की रचना हुई। तमाम लोगों ने देवी देवताओं के स्वरूपों की आरती उतारी और पुष्प वर्षा की। बताया कि इस बार कोरोना के चलते शोभायात्रा को स्थगित कर दिया गया है। राकेश बाबू, प्रताप सिंह, विजय सिंह चौधरी, रामविलास, विनोद राज, कैलाश चंद्र, कुलदीप प्रकाश चंद्र, रामचंद्र, रतन लाल, कालीचरन, राजेश, महेश मिश्रा, मुकेश कुमार, ब्रजेश कुमार आदि थे।
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वीणा साहित्य परिषद ने ब्रह्मपुरी में आचार्य ज्योति स्वरूप अग्निहोत्री के निवास पर संगोष्ठी की। वक्ताओं ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि अद्वितीय रचनाकार थे। वाल्मीकि रामायण त्रेतायुग के इतिहास का प्रमाणित दस्तावेज है। यह ग्रंथ संस्कृत में लिखा गया है। संस्कृत भाषा देश की राजभाषा के लिए सर्वथा योग्य है। इस मौके पर डा. कृष्णकांत अक्षर, रामशंकर अवस्थी, रामअवतार शर्मा, नरेश चंद्र द्विवेदी, डॉ. रामबाबू पाठक आदि थे।
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