फर्रुखाबाद। 171 कर्मियों की संविदा समाप्त होने से लोहिया अस्पताल के पीकू वार्ड और ऑक्सीजन प्लांट पर सात घंटे तक ताले पड़े रहे। इस दौरान बीमार बच्चों के बेहतर इलाज की उम्मीद में आए लोगों को भटकना पड़ा। इससे विवाद की स्थिति भी बनी। बाद में बीमार बच्चों को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया। दोपहर करीब तीन बजे संविदा बहाल होने की जानकारी मिलने पर कर्मचारी काम पर लौटे, तब स्थिति सामान्य हुई।
शासन के निर्देश पर कोरोना काल में बच्चों के इलाज के लिए लोहिया अस्पताल, मोहम्मदाबाद, शमसाबाद, कमालगंज, कायमगंज सीएचसी और फतेहगढ़ एल-2 में संविदा पर 171 कर्मचारियों को तैनात किया गया था।
31 मार्च को संविदा समाप्त होने के बाद एक-एक महीने में तीन बार अनुबंध बढ़ाया गया। 30 जून को इन कर्मियों की संविदा नहीं बढ़ाई गई। इसलिए एक जून को ड्यूटी करने के बाद दो जून को कर्मचारी काम पर नहीं आए। इससे सुबह आठ बजे पीकू वार्ड व ऑक्सीजन प्लांट पर ताले पड़ गए।
लोहिया के पीकू वार्ड में भर्ती तीन बच्चों की रात को छुट्टी कर दी गई थी। अस्पताल के नियमित वार्ड ब्वाय सूरजपाल को चाबी दे दी गई। कर्मियों के ड्यूटी पर न आने से अस्पताल में हड़कंप मच गया। अस्पताल में आने वाले बच्चों को पीकू वार्ड में भर्ती नहीं किया गया। इससे लोग बच्चों को लेकर भटकते रहे।
बाद में इमरजेंसी में डॉक्टरों ने उपचार किया। कुछ लोग निजी अस्पताल लेकर चले गए। हालांकि एसीएमओ/नोडल अधिकारी पीकू वार्ड डॉ. सर्वेश यादव के आश्वासन पर दोपहर तीन बजे कर्मचारी काम पर लौट आए। इससे मरीजों को राहत मिली।
पीकू व इमरजेंसी के लगाए चक्कर, ईएमटी से मारपीट की नौबत
कायमगंज के गांव अताईपुर निवासी धनीराम के दो साल के बेटे अर्पित को संक्रमण की वजह से खून की कमी है। उसे कायमगंज सीएचसी से एंबुलेंस से दोपहर करीब सवा 12 बजे लोहिया अस्पताल लाया गया। ईएमटी शैलेश बच्चे को लेकर पीकू वार्ड पहुंचा, तो डॉ. अजय सूद ने स्टाफ न होने की बात कहकर इमरजेंसी कक्ष में जाने को कह दिया।
परिजन इमरजेंसी कक्ष में ईएमटी के साथ बच्चे को लेकर पहुंचे, तो वहां ओपीडी के मरीजों की भीड़ के बीच डॉ. मनोज पांडेय ने बालरोग विशेषज्ञ न होने की बात कह दी। बच्चे की हालत गंभीर होते देेख धनीराम गुस्सा गया और उसने ईएमटी से धक्का-मुक्की कर दी। यह देख इमरजेंसी के स्टाफ ने बच्चे को भर्ती कर लिया। इस पर मामला शांत हुआ। हालांकि बाद में बालरोग विशेषज्ञ की व्यवस्था न होने की वजह से परिजन बच्चे को लेकर निजी अस्पताल चले गए।