मौसम बदलने से बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। लोहिया अस्पताल की ओपीडी के साथ इमरजेंसी में भी मरीजों की भीड़ लगी है। अस्पताल के बेड फुल हो गए हैं और दवाइयों का टोटा होने लगा है। बुखार के लिए सबसे महत्वपूर्ण पैरासीटामाल सीरप और गोलियां ही नहीं हैं। इसके अलावा कई अन्य दवाइयां भी खत्म हो गई हैं।
लोहिया अस्पताल में मौसम के बदलते ही बुखार के अलावा डायरिया समेत अन्य बीमारियों के मरीजों की संख्या अधिक होने लगी है। बुधवार को ओपीडी में करीब 1654 मरीजों ने पंजीकरण कराया। लोहिया अस्पताल में फिजीशियन डॉक्टर अशोक कुमार ने अपने कक्ष में सुबह 11 बजे तक मरीजों को देखा। यहां पर मरीजों की काफी भीड़ रही। यहां अधिकांश मरीज बुखार व डायरिया के थे। इस बीच फिजीशिन सरकारी कार्य से चले गए। जब काफी समय तक मरीजों को उनके न आने की जानकारी हुई तो वह लोग अस्पताल में मौजूद अन्य डॉक्टरों के पास जाकर दवा ली। बाढ़ के बाद अब ग्रामीण इलाके के साथ ही शहर क्षेत्र में भी बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
दवाओं की कमी के चलते लोग बाहर से दवा लाने को मजबूर हैं। हालांकि यहां पैरासीटामाल मिक्स गोली है लेकिन वह बच्चों को नहीं दी जा सकती। मरीजों की संख्या अधिक होनेे से अस्पताल के बेड फुल हो चुके हैं। दूसरी मंजिल के वार्ड में भेजे जाने वाले मरीजों को भी वहां से वापस नीचे भेज दिया जा रहा है। हर रोज डायरिया, बुखार, दमा आदि बीमारियों के औसतन आठ से दस मरीज भर्ती हो रहे हैं।
दवाओं की डिमांड भेजी गई
सीएमएस डॉक्टर अशोक कुमार ने बताया कि जो दवाइयां नहीं है। उनकी डिमांड भेजी जा चुकी है। अभी तक दवाइयां नहीं आईं। हालांकि एंटी रेबीज इंजेक्शन कुछ मिल गए थे। उनको लगवाया जा रहा है।
ये हैं प्रमुख दवाएं
पैरासीटामाल गोली, सीरप, लीवर की बीमारी में दिए जाने वाला एसलीवर कैप्सूल, आंख और कान के ड्राप, इमाक्सीसिलीन कैप्सूल इस समय अस्पताल में नहीं है।
कक्ष में भीड़ घुस आने पर डॉक्टर उठ गए
फर्रुखाबाद। लोहिया अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉक्टर शेखर सक्सेना के कक्ष में काफी भीड़ लगी थी। यहां पर मरीजों ने धक्कामुक्की कर कक्ष के अंदर चले गए। यह देखकर डॉक्टर ने मरीजों से लाइन में एक-एक कर अंदर आने को कहा। इसके बाद भी मरीज नहीं मान रहे थे। इस पर डॉक्टर वहां से उठ कर चले गए। आधा घंटे बाद डॉक्टर के आने पर मरीजों ने लाइन लगा ली। इसके बाद मरीजों को देखा गया। ब्यूरो