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एआरटीओ कार्यालय में पटल सूने, काम के लिए भटकते मिले वाहन स्वामी

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Listened, vehicle owners kept wandering - फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबाद। एआरटीओ कार्यालय मेें कर्मचारियों के न आने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। दूरदराज के इलाकों से आने वाले वाहन स्वामियों को निर्धारित तारीख पर आने के बाद भी काम न होने पर फिर से फीस जमा करना पड़ती है।
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इसके बाद फिर अगली तारीख पर आना पड़ता है। इससे जहां उनका खर्च अधिक होता है वहीं कार्यालय के चक्कर लगाकर परेशान होना पड़ता है। मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने एआरटीओ कार्यालय का जायजा लिया। पेश है लाइव रिपोर्ट -
समय-12.15 बजे
स्थान- लाइसेंस पटल
लाइसेंस के पटल पर कार्यदायी संस्था से लगे संविदा कर्मचारी सचिन चौहान, अनुपम पाठक, मोहित कंप्यूटर पर काम कर रहे थे। लाइसेंस के लिए जिन लोगों को मंगलवार की तारीख मिली थी वे लाइन में लग कर फोटो खिंचवा रहे थे। लिपिक सुधीर हंस अपने पटल पर डाक रिसीव कर रहे थे।
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समय- 12.20 बजे
वाहन पंजीकरण पटल
यहां वाहन पंजीकरण, ट्रांसफर, फिटनेस के लिए वाहन स्वामी भटक रहे थे। पटल के लिपिक राजेंद्र कुमार अवकाश पर थे। उनके स्थान पर किसी और लिपिक को जिम्मेदारी नहीं दी गई। काम न होने से कई वाहन मालिकों अब फिटनेस के लिए दोबारा से ऑनलाइन फीस जमा कर नई तारीख लेनी होगी।
समय 12.25
कैश का पटल
कैश के पटल पर तैनात लिपिक भीम कात्यान नहीं थे। इससे फीस जमा करने वालों की भीड़ लगी थी। दोपहर 12.30 बजे वह कार्यालय आए। उन्होंने बताया कि वह मथुरा गए थे। वहां से आने में देरी हो गई। उनके आते ही फीस जमा करने वालो की लाइन लग गई।
जहानगंज थाना क्षेत्र के गांव कोरी खेड़ा निवासी अभिषेक कुमार ने बताया कि बोलेरो की फिटनेस करवाने के लिए आए हैं। दलाल ने 2500 रुपये लिए हैं। फिटनेस की सरकारी फीस 600 रुपये ही है। लिपिक के न आने के कारण बिना टैक्स अपडेट किए ऑनलाइन फीस भी जमा नहीं हो पा रही है। इससे दिक्कत है।
कमालगंज थाना क्षेत्र के गांव जनैया सठैया से एआरटीओ कार्यालय आए दिनेश कुमार को अपने लाइसेंस का नवीनीकरण कराना था। उसने बताया कि 1500 रुपये दलाल को दिए हैं जबकि नवीनीकरण की फीस महज 500 रुपये ही है। इतना ही नहीं दिनेश एक सप्ताह से कार्यालय के चक्कर काट रहा है।
गांव भूलनपुर निवासी सोमेश कुमार ने बताया कि बाइक ट्रांसफर करवाने के लिए 15 दिनों से कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। दलाल ने 1500 रुपये लिए हैं जबकि फीस 150 रुपये ही जमा हुई है। मंगलवार को बताया गया कि अब हाईसिक्योरिटी नंबर प्लेट की फीस जमा करने के बाद ही बाइक ट्रांसफर हो सकेगी।
कार्यालय में दलालों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। उसके बाद भी कुछ लोग छिपकर अंदर आ जाते है। मैं आम जनता से भी अपील करता हूं कि सीधे आकर अपना काम करवाए। दलाल के बिना आने वाले लोगों का काम वरीयता से किया जाता है।
दलाल लाइसेंस व पंजीकरण, फिटनेस, वाहन ट्रांसफर के कितने रुपये लेते है। इसकी जानकारी नहीं है। कार्यालय के अंदर किसी पटल पर रुपये का लेनदेन नहीं होता है। सभी जगह पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। - जीवन कुमार, आरआई
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