फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Farrukhabad News: मानवता के लिए खतरा हैं जीवनशैली के विकार

विज्ञापन
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। जीवनशैली संबंधी विकार मानवता के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। एक सामान्य सी समस्या धीरे-धीरे प्रमुख बन रही है। फास्ट फूड और अनियमित दिनचर्या समय से पहले ही व्यक्ति को बूढ़ा बना रही है। कई जटल बीमारियों का उपचार आयुर्वेद में निहित है। यह बात आयुर्वेद के अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में वक्ताओं ने कही।
विज्ञापन

शुक्रवार को मेजर एसडी सिंह आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में जे जैप्स फाउंडेशन की और से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। संगोष्ठी में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों, उनकी रोकथाम और इलाज की अवधारणा को समझने के लिए आयुर्वेदिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला गया।
संगोष्ठी में डॉ. जितेंद्र यादव ने कहा कि अनियमित जीवनशैली और पाश्चात्य खानपान मानव शरीर को बीमार बना रहे हैं। कहा कि धीरे-धीरे यह व्यापक रूप ले रहा है। इसको रेाकने की जरूरत है। इनसे पनप रही बीमारियों की रोकथाम पर ध्यान देने की जरूरत है। ऐसे रोगों को रोकने के लिए आयुर्वेद ने भी महत्वपूर्ण कार्य किया है।
विज्ञापन


आयुर्वेद संस्कृत शब्द आयुर से बना है। जिसका अर्थ है जीवन और इसका अर्थ है सौम्य। आयुर्वेद लोगों को भोजन और जीवन शैली के बारे में बताता है, जिससे लोग स्वस्थ रह सकें। आयुर्वेदिक चिकित्सक शारीरिक व मानसिक अस्तित्व और व्यक्तित्व को संपूर्ण व्यक्ति के तीन अलग-अलग तत्वों के रूप में मानते हैं।

पदमश्री पुरस्कार से सम्मानित व मैंगो मैन के नाम से प्रसिद्ध हाजी कलीमुल्लाह ने भी शोध के बारे में बताया। संगोष्ठी का संचालन सिमरन आहूजा ने किया। ब्राजील, आस्ट्रेलिया, जर्मनी, नेपाल, इटली और न्यूयार्क से आए आयुर्वेद के विशेषज्ञों ने भी संक्षिप्त में विचार रखे। शनिवार को संगोष्ठी का समापन होगा। इस दौरान डायरेक्टर डा. अनीता रंजन आदि मौजूद रहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें